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‘निर्विरोध’ का फूटा ‘गुब्बारा’… पुलिस वाले ही प्रत्याशी को ले गए शिंदे के घर!.. वीडियो देख भड़के शिवसैनिक

सामना संवाददाता / मुंबई

राज्य की कई मनपाओं में चल रही चुनावी प्रक्रिया के चलते राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। महायुति के कई प्रत्याशी निर्विरोध चुनकर आए हैं। ऐसे में शिवसेना व मनसे ने सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए खलबली मचा दी है। दोनों दलों का आरोप है कि महाविकास आघाड़ी के उम्मीदवारों पर नामांकन वापस लेने के लिए सीधे तौर पर दबाव डाला जा रहा है, साथ ही पुलिस तंत्र का दुरुपयोग और सत्ता का भय दिखाया जा रहा है। पुलिस वाले ही विरोधी दलों के प्रत्याशियों पर दबाव डालकर उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बंगले पर ले गए। जहां उन्हें धमकाने के साथ उन पर पर्चा वापसी के लिए मानसिक दबाव बनाया गया।
शिवसेना के पूर्व सांसद राजन विचारे और मनसे नेता अविनाश जाधव ने पत्रकार परिषद में दावा किया कि उनके पास इससे जुड़ा वीडियो है, जिसमें उनके एक उम्मीदवार को एक पुलिस अधिकारी के माध्यम से उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के ठाणे स्थित निवास पर ले जाया गया। नेताओं के अनुसार, इसके बाद संबंधित उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया।
चल रहा है पुलिस और धनबल का खुला खेल!
मनपा चुनावों में निर्विरोध चुने जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिवसेना और मनसे ने महायुति पर सत्ता का खुलेआम दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। मनसे नेता अविनाश जाधव ने कहा कि उम्मीदवार विक्रांत घाग को एक पुलिस अधिकारी के साथ उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आवास पर ले जाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि एक चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार को पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में किसी मंत्री के घर क्यों ले जाया गया? जाधव ने आरोप लगाया कि चुनाव में पुलिस और धनबल का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है।
अविनाश जाधव ने चुनाव अधिकारियों वृषाली पाटील और सत्वशीला शिंदे की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने सवाल किया कि ठाणे में जिन तीन उम्मीदवारों को निर्विरोध चुना गया, वे सभी उसी क्षेत्र से वैâसे हैं, और वहां मौजूद निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन क्यों वापस लिए गए या रद्द किए गए? उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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