सना खान
ऑफिस से लौटते वक्त वो आदमी रोज सड़क के उसी मोड़ पर रुकता था। वहां एक छोटी-सी फूलों की दुकान थी। वो हर शाम एक सफेद गुलाब खरीदता, कुछ पल उसे देखता और फिर चुपचाप चला जाता। दुकान वाले लड़के को ये बात हमेशा अजीब लगती थी, क्योंकि उसने कभी उस आदमी के साथ किसी को नहीं देखा था। न कोई पत्नी, न कोई प्रेमिका। फिर भी वो रोज फूल ले जाता था। एक दिन लड़के ने हिम्मत करके पूछ ही लिया, ‘साहब, आप ये फूल किसके लिए ले जाते हो?’ आदमी हल्का सा मुस्कुराया। फिर बोला, ‘एक ऐसे इंसान के लिए, जो अब मेरे साथ नहीं है।’ लड़का चुप हो गया, लेकिन उस आदमी की आंखों में ऐसा खालीपन था, जो किसी एक जवाब से भरा नहीं जा सकता था। अगले दिन बारिश बहुत तेज थी। दुकान बंद करने ही वाला था कि वो आदमी फिर आ गया। पूरी शर्ट भीगी हुई थी। उसने हमेशा की तरह एक सफेद गुलाब लिया। लड़के ने कहा, ‘आज मत जाइए, कल दे दीजिएगा।’ आदमी हल्का सा हंसा। ‘कुछ आदतें एक दिन छोड़ दो न तो पूरी जिंदगी अधूरी लगती है।’ उस दिन लड़का चुपचाप उस आदमी के पीछे चल पड़ा। कुछ दूर जाकर वो आदमी एक पुराने कब्रिस्तान के सामने रुक गया। वो धीरे-धीरे एक कब्र के पास जाकर बैठ गया। बहुत प्यार से उसने वो सफेद गुलाब वहां रखा और बस काफी देर तक कुछ बोलता रहा। इतनी दूर से लड़के को शब्द सुनाई नहीं दे रहे थे, लेकिन उसकी आवाज में जो अपनापन था, वो साफ महसूस हो रहा था। कुछ देर बाद आदमी ने कब्र पर हाथ फेरा और धीमे से बोला, ‘आज भी दिन का सबसे अच्छा हिस्सा तुमसे बात करना ही लगता है।’ लड़के की आंखें भर आईं। उसे पहली बार समझ आया कि कुछ लोग मरने के बाद भी इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बने रहते हैं। घर में उनकी आवाज नहीं होती, लेकिन आदतें रह जाती हैं। चाय बनाते वक्त, खिड़की खोलते वक्त, रास्ते चलते वक्त हर जगह। उस दिन के बाद लड़का हर शाम सबसे ताजा सफेद गुलाब अलग रख देता था।
