मुख्यपृष्ठस्तंभअब तो जगजाहिर हो गया ‘विश्वगुरु’! परीक्षा नहीं, पूरी व्यवस्था कटघरे में!!

अब तो जगजाहिर हो गया ‘विश्वगुरु’! परीक्षा नहीं, पूरी व्यवस्था कटघरे में!!

भारत की परीक्षा व्यवस्था में कथित पेपर लीक को विदेशी मीडिया ने महज नीट की प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, सरकारी जवाबदेही और संस्थागत विश्वसनीयता के गंभीर संकट के रूप में प्रस्तुत किया है। ब्लूमबर्ग, न्यूयॉर्क टाइम्स, अल जजीरा, एबीसी ऑस्ट्रेलिया, अरब न्यूज और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों की रिपोर्टिंग का साझा निष्कर्ष है कि मामला इसलिए ‘बड़ा घोटाला’ बन गया, क्योंकि इसके प्रभाव और विरोध दोनों राष्ट्रीय सीमाएं पार कर चुके हैं।
नहीं लौटा पाए विद्यार्थियों का भरोसा
पहला कारण इसका ‘असाधारण पैमाना’ है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा से करीब २० लाख अभ्यर्थी जुड़े थे। दोबारा परीक्षा, गिरफ्तारियां और कार्रवाई का आश्वासन भी विद्यार्थियों का भरोसा नहीं लौटा सके। रायटर्स आधारित रिपोर्ट ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बताया।
युवा आक्रोश का विस्फोट
दूसरा कारण यह है कि आंदोलन परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। विदेशी मीडिया ने इसे बेरोजगारी, महंगी शिक्षा, घटते अवसरों और बार-बार होने वाली भर्ती-परीक्षा गड़बड़ियों से उपजे व्यापक युवा आक्रोश का विस्फोट माना। अल जजीरा के अनुसार, सोशल मीडिया पर व्यंग्य से शुरू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ अभियान लाखों युवाओं का आंदोलन बन गया और उसकी मांगें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से लेकर समूची परीक्षा प्रणाली में सुधार तक पहुंच गईं।
लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन
तीसरा कारण सरकार की प्रतिक्रिया रही। संसद मार्च रोकने के लिए रास्ते बंद करना, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और आंसू गैस की तस्वीरों ने मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक अधिकारों की बहस में बदल दिया। पुलिस के अनुसार, झड़पों में १७८ से १८० लोग घायल हुए। हालांकि, प्रदर्शनकारियों और पुलिस के दावों में अंतर रहा। एबीसी ने इसे मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा सार्वजनिक प्रतिरोध बताया, जबकि ग्लोबल पोस्ट ने वर्षों के सबसे बड़े सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में गिना।
असली घोटाला प्रश्नपत्र चोरी नहीं
विदेशी मीडिया की दृष्टि में असली घोटाला केवल प्रश्नपत्र चोरी नहीं है। असली संकट यह है कि जिस परीक्षा को प्रतिभा और मेहनत का निष्पक्ष द्वार माना जाता था, वही युवाओं की नजर में भ्रष्टाचार, असमानता और राजनीतिक उदासीनता का प्रतीक बन गई। यही विश्वास का टूटना इसे भारत का सबसे बड़ा शिक्षा घोटाला बनाता है।

अन्य समाचार