सामना संवाददाता / मुंबई
वर्ष १९९९ में जब भाजपा की ओर से महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री किसी गैर-मराठी को बनाने का प्रस्ताव आया, तब हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने सत्ता को ठोकर मार दी थी। इसी मराठी प्रेम के संस्कार हम पर भी हुए हैं। मराठी की यह मजबूती हमें बचपन से ही मिली है। इसी वजह से आज सत्ताधारियों को त्रिभाषा थोपने का पैâसला वापस लेना पड़ा। मराठी भाषा, मराठी लोगों और महाराष्ट्र से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस तरह की भूमिका स्पष्ट करते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में जब कोई जरूरत नहीं है, तब भी त्रिभाषा थोपने की कोशिश की गई, इसपर केवल मोर्चे की चर्चा होते ही उन्हें पीछे हटना पड़ा।
राज ठाकरे ने कहा, ‘कोई भी आए और सत्ता के बल पर जबरदस्ती करे, यह नहीं चलेगा। तुम्हें यह मजाक लग रहा होगा? लेकिन याद रखो, विधानसभा में तुम्हारे पास सत्ता है, पर सड़क पर हमारे पास सत्ता है।
वर्ली के एनएससीआई डोम में आयोजित विजयी महासभा में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने कड़े शब्दों में कहा कि मेरे महाराष्ट्र की ओर कोई टेढ़ी नजर से देखने की कोशिश भी न करे। राज ठाकरे ने कहा कि मुंबई को स्वतंत्र किया जा सकता है या नहीं, यह परखने के लिए ही सत्ताधारियों ने पहले मराठी भाषा को छेड़कर देखा। त्रिभाषा थोपने की कोशिश की गई। उनकी चाल यह थी कि अगर महाराष्ट्र शांत रहा तो अगला कदम उठाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिसने मां का दूध पीया है, वह आकर मुंबई और महाराष्ट्र को छूकर दिखाए। हम शांत हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम बेवकूफ हैं।
राज ठाकरे ने कहा कि किसी भी विवाद या झगड़े से बढ़कर महाराष्ट्र है। मैंने एक इंटरव्यू में यह बात कही थी। उसी के अनुसार, आज २० साल बाद उद्धव ठाकरे और मैं एक साथ आए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो काम बहुतों से नहीं हो पाया, वो देवेंद्र फडणवीस से हो गया।
राज ठाकरे ने कहा कि ये तस्वीरें भी सामने आ रही हैं कि देश में जिन राज्यों में स्थानीय भाषाओं का तगड़ा इस्तेमाल हो रहा है, वह राज्य आर्थिक नजरिए से प्रगति कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या दक्षिण के राज्यों में त्रिभाषा की जबरदस्ती करके दिखाएंगे?
बालासाहेब का सपना फिर से साकार हो!
भूमिपुत्रों की एकजुटता के कारण ही सत्ताधारियों को त्रिभाषा थोपने का पैâसला वापस लेना पड़ा। राज ठाकरे ने उम्मीद जताते हुए कहा कि इसलिए यह स्थानीय एकता हमेशा बनी रहे और महाराष्ट्र में बालासाहेब ठाकरे का जो सपना था, वह फिर से साकार हो।
