मुख्यपृष्ठनए समाचारमुंढवा जमीन घोटाले में ट्विस्ट...तेजवानी की गिरफ्तारी और रिमांड दोनों अवैध!

मुंढवा जमीन घोटाले में ट्विस्ट…तेजवानी की गिरफ्तारी और रिमांड दोनों अवैध!

-पुलिस की लापरवाही से मिली जमानत

प्रक्रिया में पाई गईं कई गंभीर त्रुटियां

सामना संवाददाता / मुंबई

पुणे के मुंढवा जमीन घोटाले में गिरफ्तार शीतल तेजवानी को बड़ी राहत मिली है। उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी और रिमांड प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई हैं और इसी आधार पर उन्हें जमानत दे दी है। खास बात यह है कि बावधन पुलिस की लापरवाही का फायदा तेजवानी को मिला, जिसकी चर्चा अब तेज हो गई है। इस पैâसले से पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुंढवा जमीन घोटाले में पुलिस द्वारा गिरफ्तारी से पहले आवश्यक प्रक्रियाओं में कई गलतियां सामने आर्इं। पुणे पुलिस ने गिरफ्तारी के समय स्पष्ट कारण नहीं बताया, वहीं पिंपरी स्थित सेवा विकास बैंक मामले में गिरफ्तारी से दो घंटे पहले सूचना देने का नियम भी नहीं निभाया गया। इन गंभीर त्रुटियों पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। इसके चलते गिरफ्तारी और उसके बाद के सभी रिमांड आदेशों को अवैध घोषित कर दिया गया। अदालत के आदेश के अनुसार, १६ दिसंबर २०२५ को बावधन पुलिस स्टेशन में सीआर नंबर ५२३/२०२५ के तहत की गई गिरफ्तारी और उससे जुड़े सभी रिमांड आदेश अवैध करार दिए गए हैं। साथ ही आगे के सभी हिरासत आदेश भी रद्द कर दिए गए हैं। इसके चलते शीतल तेजवानी को तुरंत रिहा करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, इसके लिए ५०,००० रुपए का निजी मुचलका और समान राशि के जमानतदार प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। जमानत के साथ अदालत ने कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। आरोपी किसी भी सबूत से छेड़छाड़ नहीं करेगी, गवाहों को धमकाएगी या प्रभावित नहीं करेगी और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पेश होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अदालत में नियमित हाजिरी लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं। इन शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द की जा सकती है।

पुलिस की इतनी बड़ी लापरवाही कैसे?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि पुलिस से इतनी गंभीर चूक कैसे हुई? शुरुआत से ही इस मामले की जांच पर सवाल उठते रहे हैं। अब यह भी चर्चा हो रही है कि क्या ये गलतियां जानबूझकर की गर्इं।

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