मुख्यपृष्ठस्तंभकब बदलेगी मुंबई?..सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन जरूरी

कब बदलेगी मुंबई?..सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन जरूरी

उमन गुप्ता

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है। यह शहर हर दिन करोड़ों सपनों को अपने भीतर समेटता है, लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि हर मानसून में यही शहर पानी में डूब जाता है। हर साल सड़कों पर नए गड्ढे बनते हैं, ट्रैफिक की समस्या बढ़ती है और बुनियादी सुविधाओं को लेकर नागरिकों की शिकायतें खत्म नहीं होतीं। ऐसे में सवाल उठता है, आखिर मुंबई कब बदलेगी?
मुंबई केवल सरकार बदलने से नहीं बदलेगी। पिछले तीन दशकों में मनपा की सत्ता के समीकरण कई बार बदले, नए चेहरे आए, नई योजनाएं बनीं और बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन शहर की मूल समस्याएं आज भी वहीं खड़ी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है कि शहर के विकास की योजनाओं में दीर्घकालिक दृष्टि और जवाबदेही का अभाव दिखाई देता है। मुंबई तब बदलेगी, जब हर साल मानसून से पहले होने वाले नाला सफाई कार्यों का स्वतंत्र ऑडिट होगा और जनता के सामने पूरा हिसाब रखा जाएगा। मुंबई तब बदलेगी, जब सड़क बनाने वाले ठेकेदारों की जवाबदेही तय होगी और खराब निर्माण पर केवल नोटिस नहीं, बल्कि आर्थिक दंड और ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई होगी। मुंबई तब बदलेगी, जब विकास परियोजनाओं की समय-सीमा तय होगी और वर्षों तक अधूरी रहने वाली परियोजनाओं पर राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई देगी।
जनता को मांगना होगा जवाब
शहर तब बदलेगा- जब फुटपाथ, पार्क, सार्वजनिक परिवहन और झुग्गी पुनर्वास जैसे मुद्दों को चुनावी घोषणापत्र से निकालकर जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुंबई तब बदलेगी, जब नागरिक भी केवल चुनाव के समय नहीं बल्कि पूरे पांच वर्षों तक प्रशासन से जवाब मांगेंगे। लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और निगरानी किसी भी शहर को बदलने की सबसे बड़ी ताकत होती है। मुंबई को बदलने के लिए नए नारों की नहीं, नई कार्य संस्कृति की जरूरत है।

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