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साइबर ठगी के `कॉल सेंटरों’ पर क्यों नहीं पड़ती ईडी की नजर?.. लूट की फैक्ट्री पर एजेंसियों की चुप्पी

खीरी साइबर क्राइम पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि देश में साइबर ठगी अब छुटपुट अपराध नहीं, बल्कि संगठित उद्योग बन चुकी है। खमरिया क्षेत्र के एक मकान से १२ आरोपियों की गिरफ्तारी और १,४९४ सिम कार्ड, २७ मोबाइल, दर्जनों बैंक कार्ड, पासबुक, चेकबुक और फर्जी दस्तावेजों की बरामदगी बताती है कि यह गिरोह गरीबों के नाम पर अमीर अपराधियों का नेटवर्क चला रहा था।
सबसे खतरनाक बात यह है कि गिरोह ने तकनीकी हैकिंग से ज्यादा सामाजिक कमजोरी को हथियार बनाया। गरीब, ग्रामीण और भोले लोगों को आयुष्मान कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज जुटाए गए। फिर उन्हीं के नाम पर बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट और सिम कार्ड बनवाकर ठगी की रकम घुमाई गई। असली अपराधी पर्दे के पीछे रहे और कानून की पहली मार उन्हीं गरीबों पर पड़ने की आशंका रही, जिनका इस्तेमाल मोहरे की तरह किया गया।
यह केवल खीरी की कहानी नहीं है। देश के अनेक शहरों में ऐसे साइबर ठगी केंद्र, फर्जी कॉल सेंटर और बेटिंग ऐप से जुड़े नेटवर्क चल रहे हैं। सवाल यह है कि जब इतने बड़े पैमाने पर संदिग्ध खातों, सिम कार्डों और डिजिटल लेनदेन का खेल चल रहा है, तो वित्तीय अपराधों पर हर जगह सक्रिय दिखने वाली एजेंसियों की नजर इन नेटवर्कों पर क्यों नहीं पड़ती? राजनीतिक मामलों में बिजली की तेजी दिखाने वाली जांच मशीनरी अगर ऐसे साइबर लुटेरों पर भी उतनी ही सख्ती दिखाए, तो लाखों लोगों की कमाई बच सकती है। खीरी पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन अब जरूरत जड़ों तक पहुंचने की है, कॉल सेंटरों, ऐप संचालकों, बैंकिंग दलालों और डिजिटल भुगतान की काली सुरंगों तक।
फेसबुक का ‘कुत्ता’ बना ठगी का जाल
गाजियाबाद में साइबर ठगों ने ऑनलाइन खरीदारी के नाम पर एक महिला को लाखों रुपए का चूना लगा दिया। महिला ने फेसबुक पर मात्र ३ हजार रुपये में पालतू कुत्ता बेचने का विज्ञापन देखा था। सस्ते सौदे के लालच में उन्होंने संपर्क किया तो ठगों ने पहले बुकिंग राशि मांगी। इसके बाद ट्रांसपोर्ट, बीमा, डिलिवरी चार्ज और अन्य शुल्कों के नाम पर लगातार रकम जमा कराते रहे। आरोपियों ने महिला को भरोसा दिलाया कि कुत्ते की डिलिवरी होते ही अतिरिक्त जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। इसी भरोसे में पीड़िता ने अलग-अलग किश्तों में करीब २.२६ लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। लेकिन न तो पालतू कुत्ता मिला और न ही पैसे लौटाए गए। जब आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब महिला को ठगी का अहसास हुआ। पीड़िता की शिकायत पर इंदिरापुरम थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस और साइबर सेल आरोपियों की तलाश में जुटी है। यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले सस्ते सौदे अक्सर ठगी का जाल हो सकते हैं। ऑनलाइन खरीदारी में बिना सत्यापन के अग्रिम भुगतान करना भारी नुकसान करा सकता है।

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