-१२ लाख अपात्र लाभार्थियों पर सरकारी खजाना लुटाया
सामना संवाददाता / मुंबई
महायुति सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाडली बहन’ योजना में अपात्र लाभार्थियों को लेकर चौंकानेवाली जानकारी सामने आई है। सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार, जून २०२६ तक करीब १२ लाख अपात्र लाभार्थियों पर ९,६०५ करोड़ रुपए खर्च किए गए। यानी महायुति सरकार ने खजाने से हजारों करोड़ रुपए ऐसे लाभार्थियों को बांटे, जो योजना के पात्र नहीं थे। सरकार ने वोटों के लिए जमकर सरकारी खजाने लुटाए हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले जोर-शोर से शुरू की गई इस योजना पर पिछले २४ महीनों में सरकार ने ७६,२३१ करोड़ रुपए खर्च किए हैं। योजना शुरू होने के बाद अपात्र लाभार्थियों को हटाने के लिए कई बार सूची में संशोधन किया गया, इसके बावजूद बड़ी संख्या में गलत लाभार्थी योजना का लाभ लेते रहे। जानकारी के मुताबिक, ६२ लाख महिलाओं की ई-केवाईसी पूरी नहीं हुई, जबकि १६ लाख महिलाओं की वार्षिक आय २.५ लाख रुपए से अधिक है। संजय गांधी निराधार योजना के ३.६० लाख लाभार्थी, एक ही परिवार में दो से अधिक लाभार्थी वाले २.५० लाख मामले और ६५ वर्ष से अधिक उम्र की १.८० लाख महिलाएं भी जांच के दायरे में आर्इं। इसके अलावा ४.५० लाख सरकारी कर्मचारियों को योजना से बाहर किया गया, जबकि जिला स्तरीय सत्यापन के बाद १.७० लाख अन्य लाभार्थियों को भी हटाया गया।
वर्तमान में करीब १ करोड़ ६५ लाख महिलाएं योजना का लाभ ले रही हैं। फरवरी और मई २०२५ में यह संख्या २ करोड़ ४ लाख तक पहुंच गई थी।
दोषियों पर कार्रवाई हो : जयंत पाटील
राकांपा नेता जयंत पाटील ने कहा कि जरूरतमंद महिलाओं को सहायता मिलनी चाहिए, लेकिन जनता के पैसे का इस तरह लापरवाही से इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि योजना लागू करने से पहले पात्रता की जांच क्यों नहीं की गई और हजारों करोड़ के नुकसान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
