अरुण कुमार गुप्ता
दिशाहीन नेतृत्व इस देश को रसातल में ले जा रहा है। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि देश के इस दिशाहीन नेतृत्व के अब तक के कार्य खुद सिद्ध कर रहे हैं। सबसे पहले एक चौथी फेल नेतृत्व ने नोटबंदी की। जो नए नोट छापे उनका आकार छोटा कर दिया, जबकि एटीएम मशीनें बड़े नोटों के हिसाब से बनाई गई थीं, उन्हें फिर रीवैâलिबरेट करना पड़ा और पूरा देश नोटों को लेकर परेशान हुआ। फिर जीएसटी लेकर यह नेतृत्व आया। जीएसटी में रोटी को अलग और पराठे को अलग स्लैब में रखा। बन को अलग और मक्खन को अलग स्लैब में रखा। यही नहीं बन मक्खन को अलग स्लैब में रखा। बाद में विरोध हुआ तो वापस लिया। इसके बाद कोरोना आया। रात ८ बजे लॉकडाउन घोषित कर दिया। लोग हजारों किलोमीटर पैदल चलकर अपने-अपने गांव लौटे। कुछ तो रास्ते में ही भूखे- प्यासे दम तोड़ दिए। पूरे देश में हाहाकार मच गया और कोरोना भगाने के लिए लोगों से ताली बजवा दी। इस बीच पीएम केयर फंड बनाया। करोड़ों रुपए डोनेशन के रूप में लिया और खर्च एक भी चवन्नी नहीं किया। हाहाकार तो मचा ही था इस बीच जमकर भ्रष्टाचार हुआ। अब यही नेतृत्व इथेनॉल पॉलिसी लेकर आया और कहा कि ६ से ७ साल में लागू होनेवाली पॉलिसी है, लेकिन इसे डेढ़ साल में ही लागू कर दिया। गन्ने का भरपूर उपयोग किया। अपने मंत्री के बेटों को अरबपति बना दिया। नतीजे में देश में अब चीनी की कमी हो गई है। बोला था कि इथेनॉल से पेट्रोल का आयात कम होगा और डॉलर बचेगा। अब यही दिशाहीन नेतृत्व चीनी आयात करने की बात कर रहा है। क्योंकि देश में जो २५ लाख टन गन्ने से चीनी बनानी थी उससे ‘गंदाकरी’ ने इथेनॉल बनाना शुरू किया। नतीजे में अब चीनी के लिए देश में हाहाकार मच गया है। चीनी १०० रुपए प्रति किलो का आंकड़ा छूने को तैयार है। एक समय देश चीनी निर्यात करता था अब नौबत ऐसी आ गई है कि चीनी आयात करनी पड़ रही है। ४,००० करोड़ की चीनी आयात की जानेवाली है वह भी ड्यूटी फ्री। यानी ८,००० करोड़ का नुकसान। अब इतने के बाद देशवासियों को समझ आ जाना चाहिए कि देश का नेतृत्व किन जाहिलों के हाथ में है।
भाजपा के खिलाफ गुस्सा!
देशभर में भाजपा के खिलाफ लोगों में गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। लोगों की बात मेन स्ट्रीम मीडिया सरकार तक नहीं पहुंचा रहा है। ऐसे में वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का भरपूर उपयोग करने लगे हैं और जमकर मोदी सरकार पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं, लेकिन बेशर्म सरकार चुप्पी साधे हुए है। अब लोगों के इस गुस्से को देखते हुए कॉकरोच जनता पार्टी आगे आई है। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया है, जिसमें उसने पांच बड़े वादे किए हैं। पहले वादे में उसने कहा है कि यदि कॉकरोच जनता पार्टी सत्ता में आई तो किसी भी चीफ जस्टिस को राज्यसभा में भेजनेवाले इनाम जैसी राजनीति खत्म कर देगी। दूसरा वादा किसी भी वोट को डिलीट करने पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ यूएपीए के तहत कार्रवाई होगी। पार्टी का कहना है कि किसी का वोटिंग अधिकार छीनना सबसे बड़ा अपराध है। तीसरे वादे में उसने कहा है कि महिलाओं को सिर्फ ३३ प्रतिशत नहीं ५० प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। यह आरक्षण संसद से लेकर वैâबिनेट तक लागू होगा। चौथे वादे में कॉकरोच जनता पार्टी ने कहा है कि अडानी और अंबानी से जुड़े सभी मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे, ताकि स्वतंत्र मीडिया को जगह मिल सके। साथ ही कथित गोदी मीडिया के एंकरों के बैंक अकाउंट की जांच कराई जाएगी। पांचवें वादे में दल बदल कानून पर २० साल तक रोक लगाने की बात कही गई है। पार्टी बदलने वाले सांसदों और विधायकों को २० वर्ष तक चुनाव लड़ने और सरकारी पद लेने पर प्रतिबंध होगा। इस तरह कॉकरोच जनता पार्टी ने जनता की भावनाओं को देखते हुए वर्तमान व्यवस्था पर चोट किया है।
