-कांग्रेस का आयोजन, छात्राओं से संवाद राहुल का; फिर सीओईपी हॉस्टल में टकराव क्यों? -अराजकता की साजिश के आरोपों से गरमाई पुणे की राजनीति
सामना संवाददाता / पुणे
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले पुणे के सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी हॉस्टल परिसर में एनएसयूआई-यूथ कांग्रेस और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प ने कार्यक्रम को राजनीतिक टकराव में बदल दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब कार्यक्रम कांग्रेस और राहुल गांधी का था तो एबीवीपी कार्यकर्ताओं की वहां सक्रिय मौजूदगी किस उद्देश्य से थी?
माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई है!
पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से ठीक पहले एबीवीपी हंगामें ने कई सवाल खड़े किए है। घटना को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम से पहले माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई है।
विवाद के दोनों पक्षों के दावे बिल्कुल उलट हैं। एबीवीपी का आरोप है कि एनएसयूआई और कांग्रेस से जुड़े लोग छात्राओं पर राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराने का दबाव बना रहे थे। दूसरी ओर कांग्रेस का आरोप है कि कार्यक्रम का समर्थन करने और छात्रवृत्ति जैसे मुद्दे उठानेवाली दो छात्राओं को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हॉस्टल में कथित तौर पर धमकाया और रोका। वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने छात्राओं को धमकाए जाने का आरोप लगाया।
एफआईआर भी कांग्रेस खेमे पर
टकराव के बाद शिवाजीनगर पुलिस ने एबीवीपी से जुड़े एक छात्र की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए छह-सात नामजद लोगों और करीब ५० से ६० एनएसयूआई तथा यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत में मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस सीसीटीवी तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। यहीं से विवाद और गहरा हो जाता है। विपक्ष सवाल उठा सकता है कि यदि घटनास्थल पर दोनों संगठनों के लोग आमने-सामने थे और दोनों तरफ से गंभीर आरोप हैं तो पुलिस कार्रवाई का दायरा किस आधार पर तय किया गया? यह सवाल जांच से ही साफ होगा।
पहले ३० शर्तें, फिर कैंपस टकराव
राहुल गांधी के कार्यक्रम को पुणे पुलिस ने अनुमति तो दी, लेकिन उस पर करीब ३० शर्तें लगा दी थीं। आपत्तिजनक पोस्टर-बैनर, कानून-व्यवस्था प्रभावित करनेवाली गतिविधियों और अन्य प्रतिबंधों को लेकर विपक्ष पहले ही सरकार पर कार्यक्रम को असामान्य रूप से नियंत्रित करने का आरोप लगा रहा था। इसके ठीक बाद सीओईपी परिसर का टकराव होने से कांग्रेस की यह राजनीतिक दलील और तेज हो सकती है कि राहुल के छात्र संवाद को लेकर सत्ता पक्ष असहज है। राहुल गांधी का पुणे कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं और उनके मुद्दों पर केंद्रित है। इसमें करीब दस हजार प्रतिभागियों की संभावना जताई गई है।
