– चुनाव आयोग का ‘पर्सनल’ जवाब, आरटीआई ने खोल दी पारदर्शिता की पोल!
– साकेत गोखले ने ६ बिंदुओं में मांगा हिसाब, आयोग ने ३१ जुलाई को धारा ८(१)(र) का हवाला देकर जानकारी रोक दी
अरुण कुमार गुप्ता / मुंबई
भारत के चुनाव आयोग से जनता के पैसे का हिसाब मांगना क्या अब ‘निजी जानकारी’ मांगना हो गया है? मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आधिकारिक दौरों और उन पर हुए सरकारी खर्च का विवरण मांगनेवाले पूर्व राज्यसभा सदस्य साकेत गोखले के आरटीआई आवेदन पर चुनाव आयोग के जवाब ने यही सवाल खड़ा कर दिया है। २१ अगस्त २०२६ को सामने आई जानकारी के मुताबिक, आयोग ने खर्च का विवरण देने से इनकार किया और आरटीआई एक्ट की धारा ८(१)(र) का हवाला देते हुए इसे ‘व्यक्तिगत जानकारी’ बताया।
१८ जून की आरटीआई ३१ जुलाई को इनकार
गोखले ने १८ जून २०२६ को आरटीआई दाखिल की। उन्होंने जानकारी १९ फरवरी २०२५ से, यानी ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद किए गए आधिकारिक दौरों की मांगी थी। आवेदन में कुल ६ प्रमुख श्रेणियों में जानकारी मांगी गई थी। घरेलू और विदेशी दौरों की संख्या, तारीख, गंतव्य, यात्रा का उद्देश्य, यात्रा का माध्यम, सरकारी खर्च पर साथ गए अधिकारियों की संख्या तथा यात्रा, होटल, दैनिक भत्ता, स्थानीय परिवहन और अन्य खर्च का ब्रेक-अप। यानी सवाल निजी छुट्टियों या व्यक्तिगत यात्राओं का नहीं था। गोखले के मुताबिक, आवेदन में पूरी हो चुकी सरकारी यात्राओं और सार्वजनिक धन से हुए खर्च की जानकारी मांगी गई थी। न भविष्य की यात्रा का कार्यक्रम मांगा गया था, न रियल-टाइम लोकेशन और न सुरक्षा या एस्कॉर्ट की जानकारी।
