सुनील ओसवाल / मुंबई
सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए नासिक में मंजूर २,२७० करोड़ रुपए के १८ सड़क विकास कार्यों की निविदा प्रक्रिया पर शिकायतों के बाद फडणवीस सरकार ने विशेष जांच समिति गठित कर दी है, लेकिन अब जांच से ज्यादा सवाल जांच के तरीके पर उठ रहे हैं। आरोप है कि नासिक के करोड़ों रुपए के कामों की पड़ताल नागपुर में बैठकर दस्तावेज मंगाकर की जा रही है। सवाल यह है कि जिन सड़कों पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं, उनकी हकीकत फाइलों में बैठकर वैâसे सामने आएगी?
सार्वजनिक निर्माण विभाग ने नागपुर विभाग के मुख्य अभियंता माने की अध्यक्षता में समिति बनाई है। समिति को महज १५ दिनों में रिपोर्ट देनी है। उसे निविदा प्रक्रिया, ठेकेदारों के बीच कथित कार्टलाइजेशन, पात्रता शर्तों, प्रतिस्पर्धा, दरों, तकनीकी मंजूरी और अधिकारियों की भूमिका की जांच करनी है।
जांच के दायरे में नासिक जिले के १६ और अहिल्यानगर जिले के दो काम हैं। इनमें त्र्यंबकेश्वर का करीब ३५० करोड़ रुपए का सड़क कार्य, सिन्नर-इगतपुरी मार्ग का २०७ करोड़ रुपए का काम और करोड़ों रुपए के सड़क चौड़ीकरण व सुधार प्रकल्प शामिल हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल साइट निरीक्षण को लेकर है। सड़क की वास्तविक चौड़ाई, निर्माण की मोटाई, इस्तेमाल हुई सामग्री, डिजाइन के मुताबिक, काम और गुणवत्ता की जांच केवल कागज देखकर संभव नहीं है। यदि समिति मौके पर नहीं पहुंचती तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकार से सीधे सवाल
समिति ने अब तक कितने निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया?
कितने अधिकारियों और ठेकेदारों के बयान दर्ज किए गए?
क्या हर बड़े प्रकल्प की तकनीकी गुणवत्ता की मौके पर जांच होगी?
१५ दिनों में इतनी बड़ी जांच कितनी गहराई से संभव है?
नासिक के कामों की जांच का मुख्य केंद्र नागपुर क्यों रखा गया?
कुंभ के नाम पर जनता के २,२७० करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। ऐसे में जांच सिर्फ फाइलों की आवाजाही तक सीमित रही तो यह पूरी कवायद सवालों के घेरे में आ जाएगी। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि जांच कागजों की होगी या जमीन पर उतरकर काम की असली तस्वीर सामने लाई जाएगी।
