-‘न्यायालय से बड़ा विधायक का आदेश है क्या?’
-संरक्षण आदेश के बावजूद काम रोकने का नोटिस
-भाजपा विधायक के पत्र को तरजीह देने पर आयुक्त को अदालत ने लगाई कड़ी फटकार
सुरेश गोलानी / भायंदर
संरक्षण आदेश पारित होने के बावजूद स्थानीय भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के कहने पर विकास कार्य रोकने का नोटिस जारी करने के मामले में मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अखंड की खंडपीठ ने शुक्रवार को मीरा-भायंदर महानगरपालिका के आयुक्त राधाबिनोद शर्मा को फटकार लगाते हुए तीखा सवाल पूछा कि ‘क्या न्यायालय से बड़ा विधायक का आदेश है?
न्यायालय की इस फटकार ने मनपा की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सत्ताधारी भाजपा द्वारा चलाए जा रहे ‘कठपुतली शासन’ अत्यधिक राजनीतिक हस्तक्षेप का फिर एक बार पर्दाफाश करके रख दिया है। यह मामला मेसर्स ग्रैंडबिल्ड लैंड डेवलपर्स एलएलपी’ नामक बिल्डर द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। खंडपीठ ने पाया कि मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा और नगर नियोजन विभाग ने न्यायालय द्वारा २७ अप्रैल को पारित स्थगन आदेश की सीधे तौर पर अनदेखी करते हुए स्थानीय भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता द्वारा लिखे गए पत्रों को प्राथमिकता दी और याचिकाकर्ता के खिलाफ काम रोकने का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद महारेरा ने भी इस प्रोजेक्ट को रोक दिया और डेवलपर के बैंक खातों को प्रâीज कर दिया गया। सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मनपा आयुक्त ने मौखिक रूप से बिना शर्त माफी मांगते हुए यह दलील दी कि उन्हें अंतरिम आदेश की जानकारी नहीं थी। हालांकि, खंडपीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए इसे कानून की अवहेलना का गंभीर कृत्य करार देते हुए प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं। तीन दिनों के भीतर अपने सभी स्टॉप-वर्क नोटिस वापस लेने का आदेश देते हुए न्यायालय ने मनपा अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस को जारी रखते हुए आयुक्त को अपनी सफाई में एक औपचारिक लिखित हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मनपा में विपक्षी दल कांग्रेस के गट नेता जय ठाकुर का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से सत्ताधारी दल के नेताओं के इशारों पर काम कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रकार की घटना सीधे तौर पर दर्शाती है कि अधिकारी या तो सत्ताधारी भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर हैं या फिर वे जानबूझकर उनके प्रभाव में काम कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम को नौकरशाही पर अपने बहुमत के दम पर सत्ताधारी भाजपा के ‘कठपुतली शासन’ और कानून को ताक पर रखकर किए जा रहे मनमानी और भ्रष्ट कार्यप्रणाली के रूप में देखा जा रहा है।
