-`आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विश्वगुरु’ के दावों की निकली हवा
-खड़गे बोले, आत्मनिर्भरता के दावों के बीच चीनी आयात क्यों?
-प्रति व्यक्ति आय पर केजरीवाल ने केंद्र को घेरा
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विश्वगुरु’ के दावों के बीच चीनी आयात और बढ़ती महंगाई को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। जहां एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सवाल उठाया कि आत्मनिर्भरता के दावों के बावजूद चीनी आयात की जरूरत क्यों पड़ रही है। वहीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रति व्यक्ति आय के मुद्दे पर केंद्र को घेरा। विपक्ष ने बढ़ती महंगाई को आम जनता की जेब पर सीधा बोझ बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
बढ़ती महंगाई को लेकर विपक्ष ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसी कड़ी में कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दावा किया कि तीन महीनों में चीनी की कीमत करीब ४० फीसदी बढ़ी और सवाल उठाया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देश भारत को चीनी आयात करने की नौबत क्यों आई।
वहीं दूसरी ओर भारत की अर्थव्यवस्था और ‘विश्वगुरु’ के दावों पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल दावा किया कि भारत की प्रति व्यक्ति आय अब बांग्लादेश से पीछे हो गई है। उनके मुताबिक, भारत की सालाना प्रति व्यक्ति आय करीब २,८०० डॉलर है, जबकि बांग्लादेश की २,९०० डॉलर। केजरीवाल ने २०१४ के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि तब भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब १,६०० डॉलर और बांग्लादेश की १,१०० डॉलर थी। यानी जिस देश से भारत आगे था, आज उसी से पीछे होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि १२ साल के विकास और ‘विश्वगुरु’ के नारों के बावजूद आम भारतीय की औसत आर्थिक स्थिति कहां पहुंची?
महंगाई ने तोड़ी आम आदमी की कमर
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि साबुन से कारों तक, मसालों से आटा, चावल, चीनी और तेल तक महंगाई का असर दिखाई दे रहा है। मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण आम जनता महंगाई की चक्की में पिस रही है।
त्योहारों से पहले जनता पर पड़ी इस महंगाई की मार का जिम्मेदार कौन है। जब देश में चीनी की कमी है और सरकार विदेश से चीनी मंगा रही है तो गन्ने और अनाज को ई-२० के लिए इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल करने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है।
-मल्लिकार्जुन खड़गे,
अध्यक्ष, कांग्रेस
आत्मनिर्भरता के दावों के बीच महंगी चीनी, और ‘विश्वगुरु’ की राह में प्रति व्यक्ति आय का सवाल आखिर किस विकास की कहानी बता रहा है? आंकड़ों की चमक और आम आदमी की जेब के बीच बढ़ता यह फासला अब मोदी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता दिख रहा है।
