सामना संवाददाता / मुंबई
पश्चिम बंगाल सहित तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी, इन पांच राज्यों के चुनावी रुझान सामने आ चुके हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता और सांसद संजय राऊत ने दो टूक बयान देते हुए कहा, ‘बुझने से पहले दीपक की लौ ज्यादा तेज हो जाती है। पश्चिम बंगाल जीतकर उनकी एक बाती और जली है, लेकिन मैं इसे एनडीए के पतन की शुरुआत मानता हूं।’ उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भले ही वे पश्चिम बंगाल और असम जीत जाएं, लेकिन देश चलाना उनके लिए आसान नहीं होगा।
‘राष्ट्रीय स्तर पर काम खत्म’
चुनावी रुझानों पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए संजय राऊत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पश्चिम बंगाल जीतने का सपना था और अब ऐसा लगता है कि भाजपा वहां सत्ता हासिल कर रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, उनका यह सपना पूरा हो गया, इसलिए अब राष्ट्रीय स्तर पर उनका काम खत्म होता दिख रहा है।
नफरत, धार्मिक उन्माद और
एसआईआर ने रोकी ममता की जीत!
-संजय राऊत का भाजपा पर हमला
नफरत, धार्मिक उन्माद और एसआईआर जैसे तरीकों के जरिए ममता बनर्जी की जीत को रोका गया। ममता बनर्जी का हारना नामुमकिन था और आज भी है। भाजपा को जो जीत मिलती दिख रही है, वह सीधे रास्ते से हासिल नहीं की गई है। यह बात शिवसेना सांसद संजय राऊत ने कही है।
कल मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने एनडीए पर हमला करते हुए कहा, ‘पिछले एक साल में एनडीए ने ऐसा कौन-सा महान काम किया है, कोई बता दे तो मैं उसका सम्मान करूंगा।’ देश की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है, गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा, नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं, देश की छवि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खराब हो रही है, प्रधानमंत्री की साख पर सवाल उठ रहे हैं, मणिपुर में हालात गंभीर हैं और कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है। उन्होंने कहा, ‘इसके बावजूद जब यह दिखाया जाता है कि लोग भारी संख्या में वोट दे रहे हैं तो यह एक घोटाले जैसा लगता है। यह जीत निष्पक्ष तरीके से नहीं मिली है, इसे स्वीकार करना चाहिए।’ अन्य राज्यों के नतीजों पर बोलते हुए संजय राऊत ने कहा कि केरल में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली है और एक राज्य उसके खाते में आया है।
समाजसेवा का अनुभव नहीं
असम में भाजपा की जीत को उन्होंने सामान्य बताया। तमिलनाडु में टीवीके नाम की पार्टी को लोगों ने वोट दिया, जिसके पास राजनीति या समाजसेवा का कोई अनुभव नहीं है। इसके बावजूद लोगों ने डीएमके और एआईएडीएमके की बजाय अभिनेता विजय थलापति को समर्थन दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि वहां विधानसभा त्रिशंकु है और किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।
९२ लाख वोट हटाए जाने का असर
उन्होंने यह भी कहा कि इन नतीजों का महिला आरक्षण से कोई संबंध नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल में ९२ लाख वोट हटाए जाने का असर है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कभी भी ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में हरा नहीं सकती, लेकिन भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से यह नतीजा आया है। अंत में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब देखना होगा कि चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इसके बदले क्या इनाम मिलता है।
