मुख्यपृष्ठस्तंभनिवेश गुरु : परिवार की आर्थिक सच्चाई

निवेश गुरु : परिवार की आर्थिक सच्चाई

भरतकुमार सोलंकी
मुंबई

आज दुनिया बदल रही है। पहले देशों की ताकत सिर्फ सेना और जमीन से मापी जाती थी, फिर जीडीपी से तुलना होने लगी और अब Capita Income घ्हम्दस यानी प्रति व्यक्ति आय से किसी देश, राज्य और शहर की वास्तविक आर्थिक स्थिति को समझा जा रहा है। आज चर्चा हो रही है कि मुंबई की प्रति व्यक्ति आय कराची से कई गुना अधिक है। भारत में दिल्ली जैसे क्षेत्रों की प्रति व्यक्ति आय अलग स्तर पर पहुंच चुकी है। लेकिन एक सवाल-क्या कभी हमने अपने परिवार की Per Capita Income’ की गणना की?
हमारे समाज में आज भी आर्थिक स्थिति को मापने का सबसे बड़ा पैमाना क्या है? शादी में कितना खर्च हुआ, कितनी बड़ी ज्वेलरी पहनी गई, कितनी महंगी गाड़ी खरीदी गई या सामाजिक कार्यक्रम में कितना दिखावा किया गया। लेकिन क्या खर्च करने से कोई समाज अमीर कहलाता है? अगर केवल खर्च ही अमीरी का प्रमाण होता, तो कर्ज में डूबे लोग भी सबसे अमीर माने जाते। असल सवाल यह है कि किसी परिवार की वास्तविक आर्थिक ताकत क्या है? उत्तर सीधा है-उस परिवार की प्रति व्यक्ति आय और उसकी निवेश क्षमता।
अब एक और गहरी बात समझिए। यदि कोई व्यक्ति अपनी आय सिर्फ रुपए में देखता है, तो उसे वास्तविक अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक स्थिति का अंदाजा ही नहीं लगता। जैसे वियतनाम की करेंसी में लाखों-करोड़ों की संख्या सामान्य लगती है, लेकिन डॉलर में गणना करते ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाती है। ठीक इसी तरह यदि भारतीय परिवार अपनी आय को सिर्फ रुपए में देखते रहेंगे, तो वे अपनी आर्थिक स्थिति का वैश्विक स्तर पर सही मूल्यांकन नहीं कर पाएंगे। आज सोना पूरी दुनिया में एक अंतर्राष्ट्रीय मूल्य का प्रतीक माना जाता है। डॉलर भी वैश्विक आर्थिक तुलना का आधार है। फिर सवाल यह है-क्या हमें अपनी आय, बचत और निवेश क्षमता को डॉलर टर्म में देखना शुरू नहीं करना चाहिए? मान लीजिए किसी परिवार की कुल वार्षिक आय १२ लाख रुपए है और परिवार में ६ सदस्य हैं। इसका मतलब प्रति व्यक्ति आय केवल २ लाख रुपए सालाना हुई। अब यदि इसे डॉलर में बदलें, तो यह लगभग २,३००–२,५०० डॉलर प्रति व्यक्ति बैठती है। तब व्यक्ति को एहसास होता है कि केवल सामाजिक खर्च और सोना जमा करने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर की आर्थिक ताकत नहीं बनती।
यही कारण है कि अब समय आ गया है कि समाज ‘किसने कितना खर्च किया’ से आगे बढ़कर ‘किसकी प्रति व्यक्ति आय और निवेश क्षमता कितनी है’ इस पर चर्चा करे।
क्योंकि भविष्य में वही समाज मजबूत कहलाएग- जो खर्च का प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, निवेश और वेल्थ क्रिएशन की वास्तविक गणना करेगा।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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