मुख्यपृष्ठस्तंभब्रजभाषा व्यंग्य :  बहक गयी बत्तो

ब्रजभाषा व्यंग्य :  बहक गयी बत्तो

नवीन सी. चतुर्वेदी

आउ भेंन बत्तो, बैठ और बताय का खबर लायी है?
खबर कोउ लायवे की चीज है? खबर तौ बनायवे की चीज है। खबर पैâलायवे की चीज है। रायते की तरें।
अरे-अरे बत्तो, यै का है गयौ है तोय? बड़ी बहकी-बहकी बातें कर रही है! सब ठीक तौ है?
ठीक होवै थोरें ही है! ठीक तौ कियौ जावै है। ठीक करवे के लिएं अनुभवी हैवौ जरूरी है। अनुभव दुकान पै नाँय मिलै, कमायौ जावै है। कमाई करवे के लिएं रात दिन मेहनत करनी परै। मेहनत तौ केवल हम ही कर रहे हैं। बाकी सब तौ बस मेला देख रहे हैं मेला।
बत्तो, अब तौ मैं यकीन के संग कह सकों कि तेरौ दिमाग घूम गयौ है! मैं का पूछ रह्यौ हों और तू का बक्कारें जाय रही है! बक्कार कहां रही हों? मैं तौ बोल रही हों। बोल रही हों चोंकि बोलवे की स्वतंत्रता है। स्वतंत्रता के बिना दम घुट जावै है। हम जानें स्वतंत्रता का होवै है। या मारें ही तौ हम स्वतंत्र है कें बोल रहे हैं। जाय जो समझनों होय वौ समझै, हम तौ तरक्की करते रहे हैं, कर रहे हैं, करते रहंगे।
बत्तो, बत्तो, नैंक रुक। मेरी कछू समझ में नाँय आय रह्यौ। सवाल कौ जवाब दैवे की बजाय तू न जानें का-का बकें जाय रही है? अरे यै तौ सोच, जो सुन रह्यौ है वा की का हालत होयगी?
अच्छा घुटरू, अब याद आयी तोय अपनी हालत की? यै तौ बताय मेरे आयवे सों पहलें तू का कर रह्यौ हुतो?
टीवी देख रह्यौ हुतो, और का! न्यूज-चैनल पै चर्चा चल रही हुती! पक्ष-विपक्ष के नेता और कछू एक्सपर्ट चर्चा कर रहे हुते। एंकर चर्चा करवाय रही हुती। और का?
का वे सब एक-दूसरे के सवाल’न कौ जवाब दै रहे हुते?
नाँय, सवाल’न कौ जवाब दैवे की जगें वे सब तौ बस्स अपनी-अपनी तान रहे हुते!
मतलब नित्त-नित्त तू बे सिर-पैर की चर्चा’न कों तौ झेल सवैâ परंतु आज पहली बार मैं अड्ड-बड्ड बोली तौ तैंनें अपनों माथौ पकर लियौ! अरे बाबरे, समय की कीमत समझ! सबसों बड़ौ खसारौ यानि नुकसान समय की बर्बादी होवै है! तू अड्ड-बड्ड सुनवौ बंद कर देयगौ तौ चैनल वारे हू सार्थक सम्वाद करवे लगंगे। सार्थकता की नींव पै ही समृद्धि के महल खड़े होमें हैं! समझौ!
आज का दिन भी जिरह करते हुए बीत गया
खास बंदे ही खसारों को समझ पाते हैं

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