समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव की अचानक मौत ने राजनीतिक और पारिवारिक शोक के साथ कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों में मौत की वजह मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म यानी फेफड़ों की नसों में खून का बड़ा थक्का फंसना बताई गई है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह अचानक बाधित होता है और कुछ ही मिनटों में हार्ट तथा सांस की प्रक्रिया ठप पड़ सकती है।
डॉक्टरों के हवाले से आई खबरों में यह भी कहा गया है कि प्रतीक यादव को पहले से डीप वेन थ्रॉम्बोसिस यानी नसों में खून के थक्के बनने की समस्या थी और उन्हें अप्रैल में ब्लड थिनर इंजेक्शन भी दिए गए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि वे मेडिकल दृष्टि से जोखिम वाली स्थिति में थे। लेकिन दूसरी ओर, सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने मौत को संदिग्ध बताते हुए दावा किया है कि शरीर पर चोट और नीले निशान थे। उन्होंने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच की मांग की है। कुछ रिपोर्टों में शरीर पर छह चोटों के निशान मिलने का उल्लेख है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में बाहरी चोट के निशान न मिलने की बात कही गई है। यही विरोधाभास मामले को और संवेदनशील बनाता है।
अब मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। एक एनजीओ ने एनएचआरसी में शिकायत देकर एसआईटी और फोरेंसिक जांच की मांग की है। ऐसे में जरूरी है कि पोस्टमार्टम, फोरेंसिक, मेडिकल हिस्ट्री और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो। किसी निष्कर्ष पर जल्दबाजी न हो, लेकिन सवालों को दबाया भी न जाए।
