– माइलेज-मरम्मत के खर्च ने बढ़ाई मुसीबत
– ५३ फीसदी गाड़ी मालिकों ने कहा, ‘माइलेज घटा’
सामना संवाददाता / मुंबई
देश में पेट्रोल के साथ २० फीसदी इथेनॉल मिलाने की नीति (ई२० ईंधन) को लेकर आम जनता के बीच नाराजगी और चिंताएं लगातार गहरी होती जा रही हैं। हाल ही में आए ‘लोकलसर्किल्स’ के एक नए सर्वे में यह बात सामने आई है कि देश के ज्यादातर पेट्रोल गाड़ी मालिकों ने सरकार द्वारा ई२० पेट्रोल को लागू करने के तरीके को बेहद खराब यानी ‘विनाशकारी’ या ‘असरहीन’ बताते हुए इसे ‘महाफ्लॉप’ बताया है।
गाड़ी मालिकों का कहना है कि पंपों पर कम इथेनॉल वाले पेट्रोल का विकल्प न मिलने, माइलेज में भारी गिरावट और इंजन में खराबी आने की वजह से वे इस नीति से बेहद परेशान हैं।
जून २०२६ में देश के ३१६ जिलों में किए गए इस बड़े सर्वे में २२,५६७ पेट्रोल गाड़ी मालिकों ने हिस्सा लिया। इसमें शामिल ४२ फीसदी लोगों ने इस नीति के क्रियान्वयन को ‘विनाशकारी’, ५ फीसदी ने ‘बहुत अप्रभावी’ और ६ फीसदी ने ‘काफी अप्रभावी’ माना। यानी कुल मिलाकर ५३ फीसदी लोग सरकार के इस कदम से पूरी तरह नाराज हैं। २०२३ से पहले बनी गाड़ियों के मालिकों में इस नीति को लेकर सबसे ज्यादा गुस्सा है। ६६ फीसदी लोगों ने दावा किया है कि ई२० पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद से उनकी गाड़ी का माइलेज १० फीसदी से भी ज्यादा घट गया है। इसके अलावा, ऐसे ४५ फीसदी मालिकों ने शिकायत की है कि उनकी गाड़ियों में टूट-फूट, खराबी या मरम्मत की जरूरत बहुत ज्यादा या मध्यम स्तर तक बढ़ गई है।
सरकार का अपना राग
एक तरफ जहां जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है, वहीं सरकार इस नीति पर अपना अलग राग आलाप रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि इथेनॉल मिक्सिंग की वजह से माइलेज पर बहुत ही मामूली असर पड़ता है। उन्होंने इंटरनेट पर चल रही आलोचनाओं को खारिज करते हुए यह भी साफ किया है कि ई२० पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंश्योरेंस कवर (बीमा) पर कोई असर नहीं पड़ता है, वह पूरी तरह वैध रहता है।
