-महायुति के खिलाफ जनता में तेज हुआ आक्रोश
-विपक्ष के दौरे पर सियासत तेज
सामना संवाददाता / मुंबई
डोंबिवली के शास्त्रीनगर मनपा अस्पताल में महिला डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हुई मारपीट के मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति को गरमा दिया है। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और डोंबिवली से भाजपा विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण की चुप्पी और अस्पताल से दूरी अब सवालों के घेरे में है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा है कि आखिर इस संवेदनशील मामले में दोनों वरिष्ठ नेता सामने क्यों नहीं आए। इन दोनों नेताओ में इस मामले में चुप्पी क्यों साध रखी है।
घटना के तुरंत बाद कल्याण लोकसभा सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने शिंदे गुट के नगरसेवक रमेश म्हात्रे के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं विपक्ष के कई नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों से मुलाकात की तथा उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख स्थानीय नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन गई है।
आलोचकों का कहना है कि राज्यभर में विभिन्न कार्यक्रमों और दौरों में सक्रिय रहनेवाले उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने डॉक्टरों पर हमले जैसे गंभीर मामले में अब तक न तो अस्पताल का दौरा किया और न ही पीड़ित स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाकात की। इसी तरह डोंबिवली के विधायक रवींद्र चव्हाण भी इस पूरे घटनाक्रम से दूर दिखाई दिए, जबकि शास्त्रीनगर अस्पताल उनके विधानसभा क्षेत्र में आता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मनपा की स्वास्थ्य व्यवस्था से लंबे समय से जुड़े रहे रवींद्र चव्हाण से इस मामले में सक्रिय भूमिका की अपेक्षा थी। लेकिन डॉक्टरों पर हमले के बाद उनकी ओर से कोई सार्वजनिक पहल सामने नहीं आने से स्थानीय स्तर पर नाराजगी और सवाल दोनों बढ़े हैं।
अस्पताल क्यों नहीं पहुंचे सत्ताधारी
इस घटना के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार और शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे अस्पताल पहुंचे, डॉक्टरों और कर्मचारियों से मुलाकात की तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। इसके बाद यह सवाल और तेज हो गया कि सत्ता पक्ष के बड़े नेता अब तक अस्पताल क्यों नहीं पहुंचे। डीसीएम एकनाथ शिंदे घटना के अगले ही दिन ठाणे मनपा में आपदा प्रबंधन की समीक्षा करते नजर आए, लेकिन डॉक्टरों से मारपीट के मामले पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं रवींद्र चव्हाण के समर्थकों का कहना है कि वे विधानसभा के मानसून सत्र में व्यस्त थे।
