मुख्यपृष्ठनए समाचारसड़क पर दिन बिता रहे मुंबईकर!

सड़क पर दिन बिता रहे मुंबईकर!

-अधूरे फ्लाईओवर से जाम का झंझट

-मुंबई की ट्रैफिक समस्या हुई विकराल

सामना संवाददाता / मुंबई

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई आज भी देश के सबसे अधिक ट्रैफिक जामवाले शहरों में गिनी जाती है। रोजाना लाखों लोग घंटों सड़क पर बिताने को मजबूर हैं। शहर में ट्रैफिक कम करने के लिए पिछले एक दशक में दर्जनों फ्लाईओवर, पुल और कनेक्टर बनाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं और जिनका काम जारी है। उन्होंने भी यातायात को और जटिल बना दिया है।
विद्याविहार फ्लाईओवर और मानखुर्द-महाराष्ट्रनगर फ्लाईओवर जैसी परियोजनाओं को पूर्वी उपनगरों की ट्रैफिक समस्या का बड़ा समाधान बताया गया था, लेकिन निर्माण में लगातार देरी के कारण यात्रियों को रोजाना भारी जाम का सामना करना पड़ रहा है। मनपा ने अब इन परियोजनाओं के लिए नई समय-सीमा तय की है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर वर्षों की देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?सायन, परेल, भायखला और प्रभादेवी जैसे इलाकों में पुलों के पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य के कारण ट्रैफिक का दबाव छोटी सड़कों पर आ गया है। नतीजा यह है कि जहां पहले २० मिनट का सफर होता था, वहां अब एक घंटे से अधिक समय लग रहा है।
फ्लाईओवरों की बढ़ती लागत पर भी सवाल
कई फ्लाईओवर परियोजनाओं की लागत में ६० से ९० प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। कुछ परियोजनाओं की अनुमानित लागत हजारों करोड़ रुपए बढ़ गई। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजनाओं की गलत योजना, भूमि अधिग्रहण में देरी और प्रशासनिक समन्वय की कमी के कारण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए फ्लाईओवर बनाना पर्याप्त नहीं है। भारी वाहन, अनियोजित पार्किंग, खराब ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन पर अत्यधिक दबाव भी है।

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