-पुलिस ने कहा, `हमारे पास पैलेट गन है ही नहीं
-आंसू गैस और लाठीचार्ज की तस्वीरें बनीं कार्रवाई की गवाह
-जब पैलेट गन थी ही नहीं, तो प्रदर्शनकारियों को छर्रे जैसे घाव कैसे लगे?
-शॉक बैटन इस्तेमाल हुआ या नहीं, पुलिस ने इस पर स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया?
-क्या कार्रवाई के दौरान तैनात प्रत्येक बल और हथियार का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाएगा?
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
संसद की ओर मार्च कर रहे युवाओं और छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के साथ पैलेट गन तथा बिजली का झटका देने वाले ‘शॉक बैटन’ का इस्तेमाल किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताते हुए कहा है कि ऐसे हथियार उसके पास हैं ही नहीं।
यह प्रदर्शन युवाओं के नेतृत्व वाले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आह्वान पर आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुआ। प्रदर्शनकारी परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने मार्च को अनुमति नहीं मिलने और संसद सत्र के दौरान सुरक्षा प्रतिबंधों का हवाला देते हुए बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश के बाद हालात बिगड़ गए। घटनास्थल के वीडियो में पुलिसकर्मियों को लाठियों और प्लास्टिक बैटन से प्रदर्शनकारियों को खदेड़ते तथा आंसू गैस के गोले छोड़ते देखा गया।
जेनजी की आवाज दबाने की ` जानलेवा कोशिश’
प्रदर्शनकारियों पर चलाए गए एक्सपायर आंसू गैस के गोले!
एक वीडियो में एक युवक दावा कर रहा है कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कथित तौर पर एक्सपायर हो चुकी आंसू गैस की नलिकाओं का इस्तेमाल किया। युवक का दावा है कि कुछ नलिकाएं २०२२ में बनी थीं और २०२५ में उनकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से इस आरोप पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
