सामना संवाददाता / मुंबई
नीट पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों पर जवाब देने के बजाय सरकार अब छात्रों की आवाज दबाने में पूरी ताकत झोंकती दिखाई दे रही है। दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी आंदोलन की आग बुधवार को मुंबई की सड़कों तक पहुंची तो पुलिस ने चेंबूर, दादर और दक्षिण मुंबई में प्रदर्शनकारियों को घेर लिया। कहीं छात्रों को सड़क पर घसीटकर पुलिस वैन में भरा गया, कहीं उन्हें आंदोलन स्थल तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया और कहीं वीडियो बनाने वालों के मोबाइल जब्त करने के आरोप लगे। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और पुलिस कार्रवाई के बाद दोबारा सड़कों तथा मैदानों में लौट आए।
चेंबूर के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर गार्डन के पास करीब ३०० छात्र, अभिभावक, युवा और वरिष्ठ नागरिक जमा हुए थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली तख्तियां थीं। भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच नारेबाजी शुरू होते ही कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कुछ लोगों को सड़क पर घसीटते हुए पुलिस वाहनों तक ले जाते देखा गया। पुलिस ने भीड़ को हटाकर विरोध समाप्त कराने की कोशिश की, लेकिन कुछ समय बाद प्रदर्शनकारी फिर गार्डन में लौट आए। संख्या कम थी, लेकिन उनके तेवर पहले से ज्यादा तीखे थे। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें आंबेडकर गार्डन पहुंचने से पहले ही रास्तों पर रोक दिया गया था। प्रदर्शनकारियों का सवाल था कि आखिर पेपर लीक और परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर जवाब मांगना कब से अपराध बन गया?
`लड़ाई बंद नहीं होगी’
दादर में भी सरकार और पुलिस के खिलाफ भारी नाराजगी दिखी। बड़ी संख्या में छात्र और सीजेपी समर्थक शिवाजी पार्क में प्रस्तावित आंदोलन के लिए पहुंचे, लेकिन शिवसेना भवन सिग्नल के आगे उन्हें रोक दिया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई छात्रों को आंदोलन शुरू होने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया। मौके का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे एक युवक को भी पुलिस द्वारा उठाए जाने तथा कुछ लोगों के मोबाइल फोन जब्त करने का दावा किया गया। कई छात्रों के साथ एक प्रदर्शनकारी के पिता को हिरासत में लिए जाने से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। पुलिस द्वारा निर्धारित मार्ग बंद किए जाने के बाद भीड़ वापस मुड़ी और शिवसेना भवन के पीछे जाकर नारेबाजी करने लगी। बाद में कई प्रदर्शनकारी अलग-अलग रास्तों से शिवाजी पार्क के भीतर पहुंचने में सफल रहे। भारी पुलिस मौजूदगी के बीच उनका आंदोलन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि धमकी, हिरासत और एफआईआर के डर से छात्रों के भविष्य की लड़ाई बंद नहीं होगी। हिरासत में लिए गए लोगों की जानकारी मिलने के बाद शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे और मनसे नेता अमित ठाकरे पुलिस स्टेशन पहुंचे।
`सरकार कानून व्यवस्था की समस्या बना रही है’
यह आंदोलन केवल छात्रों तक सीमित न रहकर व्यापक नागरिक प्रतिरोध का रूप लेता दिखाई दिया। दक्षिण मुंबई में भी पुलिस ने कांग्रेस नेताओं को आगे बढ़ने नहीं दिया। प्रदर्शन के दौरान सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लगाए गए। मुंबई के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं पर चर्चा करने के बजाय विरोध को कानून-व्यवस्था की समस्या बना रही है। पेपर लीक, परीक्षा परिणामों पर सवाल, छात्रों की मौत और जवाबदेही की मांग जैसे मूल मुद्दे पीछे धकेले जा रहे हैं।
`ऊपर से मिले हैं आदेश’
पुलिस की सख्ती के बावजूद युवाओं के हौसले नहीं टूटे। प्रदर्शन पहले आजाद मैदान में शाम चार बजे होना था और इसके लिए पुलिस की अनुमति भी मिल चुकी थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों के अनुसार, सुबह अचानक अनुमति वापस ले ली गई। इसके बाद बिना किसी औपचारिक घोषणा के केवल आपसी संदेशों और सोशल मीडिया के जरिए लोग शिवाजी पार्क पहुंचने लगे। पुलिस पहले ही कई प्रदर्शनकारियों को वैन में भरकर ले जा चुकी थी, फिर भी बढ़ती भीड़ को देखकर युवाओं का जुटना शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि एक समय पुलिस ने भीड़ की संख्या देखते हुए आगे हिरासत रोक दी और शाम छह बजे तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देनी पड़ी। हिरासत में ली गई बड़ी संख्या में महिलाओं को वरली पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां शिवसेना के कार्यकर्ताओं और वकीलों के पहुंचने तथा पुलिस से तीखी बहस के बाद उन्हें रिहा किया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस अधिकारी बार-बार यही कहते रहे कि कार्रवाई ‘ऊपर से मिले आदेशों’ के तहत की जा रही है।
-११ साल का बच्चा भी पुलिस हिरासत में
पुलिस कार्रवाई की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर तब सामने आई, जब दादर के चैत्यभूमि प्रदर्शन में अपने माता-पिता के साथ मौजूद महज ११ साल के बच्चे को भी हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने प्रदर्शन स्थल से हटने से इनकार किया तो पुलिस माता-पिता के साथ बच्चे को भी वाहन में बैठाकर थाने ले गई। सवाल उठ रहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में आए एक नाबालिग को हिरासत में लेने की क्या जरूरत थी और क्या बाल अधिकारों से जुड़े नियमों का पालन किया गया?
-शिवाजी पार्क में उतरे राज ठाकरे और आदित्य ठाकरे
-हिरासत के बावजूद नहीं थमा आंदोलन
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ चल रहे सीजेपी आंदोलन के समर्थन में बुधवार को दादर का शिवाजी पार्क बड़े विरोध स्थल में बदल गया। सैकड़ों छात्र, युवा पेशेवर, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक यहां जुटे। शुरुआती पुलिस कार्रवाई और कुछ प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बावजूद लोग दोबारा संगठित हुए और आंदोलन जारी रखा। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे अपनी पत्नी शर्मिला ठाकरे के साथ शिवाजी पार्क पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे तथा मनसे नेता अमित ठाकरे भी आंदोलन में शामिल हुए। तीनों नेताओं की मौजूदगी ने छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक मजबूती दी। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के नारे लगाए। उनका कहना था कि सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और भरोसा बहाल करने के लिए केवल जांच के आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और व्यापक सुधार जरूरी हैं। चैत्यभूमि और शिवाजी पार्क के आसपास भारी पुलिस तैनाती रही। इसके बावजूद प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और बड़ी संख्या में लोग देर तक मैदान में डटे रहे। इसी दौरान डोंगरी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी कथित पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन किया।
चेंबूर, दादर और दक्षिण मुंबई में आंदोलन कुचलने उतरी पुलिस; रास्ते रोके, मोबाइल जब्त किए, कांग्रेस नेताओं समेत सैकड़ों प्रदर्शनकारी हिरासत में
