-जीवन पर्यंत सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में था जाना-पहचाना नाम
सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
राजेंद्र प्रसाद सेठ उपाख्य ‘रज्जन सेठ’ सामाजिक सरोकारों में अपनी जिंदगी खपा देने वाली सुल्तानपुर शहर की वयोवृद्ध शख्सियत अब नहीं रहीं। सोमवार सुबह शहर के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया।
यूं तो वे करीब 90 वर्ष के हो चुके थे, लेकिन जब तक शरीर में दमखम रहा, हमेशा सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों के मुद्दों पर अगली पंक्ति में नजर आए। पिछले कुछ महीनों से वह अशक्त शरीर और वृद्धावस्थाजन्य चुनौतियों से जूझ रहे थे।
रज्जन सेठ सुल्तानपुर शहर के एक प्रतिष्ठित सामाजिक और धार्मिक व्यक्तित्व थे। वह कुशनगरी सुल्तानपुर की देशभर में विख्यात दुर्गापूजा आयोजन समिति के दशकों तक मुख्य कर्ता-धर्ता रहे। केंद्रीय पूजा व्यवस्था समिति के पूर्व अध्यक्ष और बाद में जीवन पर्यंत संरक्षक रहे। प्रसिद्ध दुर्गापूजा महोत्सव को भव्य रूप देने में उनकी अहम भूमिका रही।
सातवें दशक से ही वह शहर में दुर्गापूजा आयोजन को लेकर सक्रिय हो गए थे। वह स्वयं साइकिल से घूम-घूमकर श्रद्धालुओं को मूर्ति स्थापना के लिए प्रेरित किया करते थे। शहर में विभिन्न धार्मिक आयोजनों, राम-भरत मिलाप और सामाजिक समरसता के कार्यक्रमों में उन्होंने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई।
यूं तो रज्जन सेठ मूल रूप से कांग्रेसी विचारधारा के थे, लेकिन वर्ष 1989 में रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन शुरू होने और गांव-गांव रामशिलाओं के पूजन के दौर में वह इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के साथ खड़े हुए। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में बढ़-चढ़कर जनजागरण किया।
वह दशकों तक सुल्तानपुर नगर पालिका के सदस्य चुने जाते रहे। यही नहीं, वह धर्म के नाम पर ढोंग और पाखंड के भी विरोधी थे। पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी वह बेहद संवेदनशील रहे। उन्होंने दुर्गापूजा में देवी प्रतिमाओं के नदी में विसर्जन के विरुद्ध सार्थक मुहिम छेड़ी और प्रशासन के साथ मिलकर श्रद्धालुओं को नदी के बजाय कृत्रिम तालाबों में प्रतिमा विसर्जन के लिए प्रेरित किया।
रज्जन सेठ के निधन से सुल्तानपुरवासियों में शोक की लहर है। सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
