-प्रबंधन परिषद ने सरकार को जांच प्रस्ताव भेजने का लिया पैâसला
जेदवी / मुंबई
मुंबई विश्वविद्यालय के तृतीय वर्ष वाणिज्य (सेमेस्टर-६) की अप्रैल २०२६ की परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले ने आखिरकार नया मोड़ ले लिया है। युवासेना के लगातार आंदोलन और दबाव के बाद विश्वविद्यालय की प्रबंधन परिषद ने मामले की सीआईडी जांच कराने के लिए राज्य सरकार को पत्र भेजने का निर्णय लिया है। इससे लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे विद्यार्थियों में उम्मीद जगी है।
९ से १५ अप्रैल २०२६ के बीच हुई परीक्षा के दौरान तीन प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया था। इसके बाद विश्वविद्यालय के आईडीओएल विभाग के तीन अस्थायी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इससे संदेह और गहरा हो गया कि पेपर लीक की घटना विश्वविद्यालय के भीतर से हुई। हालांकि, परीक्षा खत्म होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। युवासेना के दबाव के बाद ही २३ अप्रैल की रात पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई।
युवासेना ने इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल उठाए। यदि प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी थी तो वैकल्पिक प्रश्नपत्र क्यों नहीं दिया गया? परीक्षा केंद्र की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी? कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक को इसकी जानकारी कब मिली? केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों हुई और अधिकारियों को जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया गया? एफआईआर दर्ज करने में एक सप्ताह की देरी क्यों हुई? क्या किसी को बचाने की कोशिश की जा रही थी?
इन सवालों को युवासेना के सीनेट सदस्यों ने मुंबई स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधायक एडवोकेट अनिल परब के माध्यम से विधान परिषद में उठाया। वहां सीआईडी जांच की मांग की गई। इसके बाद २२ जुलाई की सीनेट बैठक में भी इस मुद्दे पर जोरदार आवाज उठाई गई। अंतत: २७ जुलाई २०२६ को हुई प्रबंधन परिषद की बैठक में सीआईडी जांच के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने का पैâसला लिया गया। युवासेना ने इसे विद्यार्थियों की लड़ाई की बड़ी जीत बताया है। मुंबई विश्वविद्यालय के चर्चित पेपर लीक मामले में अब सीआईडी जांच की राह साफ हो गई है। युवासेना के लगातार दबाव और विधान परिषद से लेकर विश्वविद्यालय की सीनेट तक उठाई गई आवाज के बाद प्रबंधन परिषद ने राज्य सरकार को सीआईडी जांच के लिए पत्र भेजने का पैâसला किया है।
सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय
अप्रैल २०२६ में बीकॉम सेमेस्टर-६ परीक्षा के दौरान तीन प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया था। आईडीओएल विभाग के अस्थायी कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया, लेकिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल बने रहे। अब सीआईडी जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
