मुख्यपृष्ठनए समाचारआधी रात आबादी के सिर पर चढ़ा दी क्रेन... सुरक्षा किसके भरोसे?

आधी रात आबादी के सिर पर चढ़ा दी क्रेन… सुरक्षा किसके भरोसे?

 -कुर्ला में बेदखली-तोड़फोड़ की तैयारी के दौरान मकानों पर गिरी भारी क्रेन
-१० से १२ लोग घायल, हादसे ने खड़े किए गंभीर सवाल
-जब लोग घरों में सो रहे थे, तब तड़के ३ बजे रिहायशी
-इलाके में इतनी भारी मशीनरी चलाने की अनुमति किसने दी?

सामना संवाददाता / मुंबई

कुर्ला-ईस्ट में शुक्रवार तड़के हुआ क्रेन हादसा अब महज दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल बनकर सामने आया है। इंदिरा नगर स्थित बंटारा भवन के पास सुबह करीब ३ बजे एक विशाल क्रेन पलटकर आसपास के मकानों पर जा गिरी। शुरुआती रिपोर्टों में कम से कम आठ लोगों के घायल होने की बात कही गई, जबकि बाद की कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या दस तक बताई गई है। सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि यह क्रेन किसी सामान्य निर्माण कार्य के लिए नहीं, बल्कि म्हाडा की प्रस्तावित बेदखली और तोड़फोड़ कार्रवाई की तैयारी के दौरान लगाई जा रही थी। यानी जिस समय पूरा इलाका नींद में था, उसी समय घनी आबादी के बीच भारी मशीनरी तैनात की जा रही थी।
अब सवाल है कि रात के तीन बजे ऐसी कार्रवाई की जरूरत क्या थी? क्या क्रेन खड़ी करने से पहले आसपास के मकानों को खाली कराया गया था? क्या लोगों को पहले से चेतावनी दी गई थी? क्या क्रेन के संचालन क्षेत्र को बैरिकेड लगाकर सुरक्षित किया गया था? क्या जमीन की मजबूती और क्रेन की लोड क्षमता की जांच हुई थी? और सबसे अहम, क्या मौके पर कोई सक्षम सुरक्षा अधिकारी मौजूद था? घटना की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्रेन मकानों पर गिरने के साथ रेलवे की ओवरहेड बिजली व्यवस्था तक जा पहुंची। मालगाड़ियों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। यह घटना प्रशासन के लिए चेतावनी है कि तोड़फोड़ या बेदखली की कार्रवाई सिर्फ कानूनी अनुमति से सुरक्षित नहीं हो जाती। भारी मशीनरी के इस्तेमाल के लिए अलग तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन भी जरूरी है।
ये सवाल मांगते हैं जवाब
तड़के ३ बजे रिहायशी इलाके में क्रेन लगाने की अनुमति किस अधिकारी ने दी?
आसपास रहनेवाले लोगों को पहले क्यों नहीं हटाया गया?
सुरक्षा घेरा और बैरिकेडिंग थी या नहीं?
क्रेन लगाने से पहले जमीन और मशीन की तकनीकी जांच हुई थी?
मौके पर सुरक्षा अभियंता मौजूद था या नहीं?
कार्रवाई की जिम्मेदार एजेंसी और ठेकेदार कौन हैं?
हादसे के लिए आपराधिक लापरवाही का मामला किस पर दर्ज होगा?
कुर्ला का हादसा सौभाग्य से बड़ी त्रासदी में नहीं बदला, लेकिन सवाल साफ है कि मुंबई में विकास और कार्रवाई के नाम पर भारी मशीनें आखिर कब तक आम लोगों के सिर पर बिना पर्याप्त सुरक्षा के चलाई जाती रहेंगी।

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