मुख्यपृष्ठस्तंभसंडे स्तंभ : वियतनाम पर्यटन में ‘इंडिया बूम’

संडे स्तंभ : वियतनाम पर्यटन में ‘इंडिया बूम’

विमल मिश्र
मुंबई

हो ची मिन्ह सिटी के प्रसिद्ध बेन थान मार्केट में दोपहर को जब हम थे उसके सारे दुकानदार ‌टिफिन खोलकर बैठे थे। चावल, सोया, चटनी तथा मछली का सूप-जो यहां का मुख्य भोजन है। शाम गहराते जहां भी गए, गली – सड़क के किनारे और फुटपाथों पर छोटे-छोटे रेस्त्रां, रेहड़ियां और स्ट्रीट फूड जाइंट्स युवा धड़कनों से गुलजार मिले। हनोई की हो किम झील के सामने ‘एग और कोकोनट कॉफी’ और ‘फो’ (नूडल सूप) टेस्ट करते हमारे आस-पास भी ये मस्त टोलियां थीं और सारे रेस्त्रां में गूंज रहे थे तराने और ठहाके। ये वियतनामी हैं, दिनभर खुद डटकर मेहनत करते हैं, पर रातें उनकी अपनी हैं।
इस देश में घूमते हुए जिन होटलों में हमारा वास रहा, वहां हम बटर-टोस्ट, कॉर्न फ्लेक्स या प्रâूट जूस से अपनी क्षुधा तृप्त करने को मजबूर थे, क्योंकि हम शाकाहारियों (कुछ आमिष भोजियों के वास्ते भी) के लिए जो अभक्ष्य है, वियतनामी भोजन में आपको वही चीजें ज्यादा मिलेंगी। यहां की सड़कों पर हमें स्ट्रीट डॉग या बिल्ली नदारद दिखे। कारण जानकर हम दंग रह गए, ‘यहां इन जैसे आवारा जानवर भोज्य पदार्थ हैं।’
हमारी रसना को लगे देशी स्वाद की कमी नहीं पड़ी तो इसका कारण थे जगह-जगह मौजूद भारतीय रेस्त्रां। भारतीय पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ प्रामाणिक और स्वादिष्ट भारतीय भोजन (शाकाहारी, वीगन, जैन और मांसाहारी) देने वाले रेस्टोरेंट्स की वियतनाम में बाढ़ सी आ गई है। हनोई, हो ची मिन्ह सिटी (साइगॉन) और दा नांग जैसे प्रमुख शहरों में ‘जलसा’ और ‘रंग’ जैसे कई बेहतरीन भारतीय रेस्टोरेंट्स मौजूद हैं, जहां आपको बिल्कुल घर जैसा स्वाद मिल जाएगा। पर वीकेंड बुकिंग की शाम को जा रहे हैं तो पहले से टेबल रिजर्व करा लीजिए, ताकि निराश न लौटना पड़े। भ‌टिंडा से आठ वर्ष पहले आए अमनदीप सिंह से बात हुई, जो अपने रेस्त्रां का सारा स्टॉफ भारत से ही लाए हैं। गुड़गांव से आए योगेश कौशिक मोटी कमाई कर रहे हैं। गुजरात रेस्टोरेंट चला रहे गांधीनगर से आए निकुल पटेल धड़ल्ले से खुद ही ‌वियतनामी नहीं बोलते, उनके कई ‌वियतनामी कर्मचारी हिंदी बोलते हैं और खाना भी इंडियन ही खाते हैं। ब्रिटेन से आए भारतीय डॉ. प्रशांत कुमार अपनी आवभगत से काफी प्रभावित दिखे। सूरत से आए होटेलियर हिरेन ने हमारी जानकारी में इजाफा किया, ‘आप हमारे रेस्त्रां को खाने के स्वाद के लिए नहीं, उसके बिल के लिए भी याद रखेंगे, जो भारत से २५ फीसदी सस्ता है।’
वियतनामी खानों को लेकर मन में जो आशंकाएं बैठ गई थीं, उनके डर से हम एकाध ही वियतनामी डिशेज चख पाए।तेल कम और हरी सब्जियां ज्यादा। मीठा, मसालेदार, खट्टा, तुलसी और पुदीना के स्वाद से परिपूर्ण। रेस्त्रां फो नूडल सूप, बान मी और समर रोल जैसे वियतनामी जैसे पॉपुलर व्यंजनों से भरे हुए। खास फ्लेवर के कारण यह स्वाद अब धीरे-धीरे हिंदुस्थानी जुबान पर भी बसता जा रहा है। खासकर मुंबई में। बांद्रा में ‘वियत नोम’, बीकेसी में ‘साइगॉन’, कुर्ला में ‘यू मी’, पवई में ‘वियतनाम एक्सप्रेस’ और ठाणे के हीरानंदानी गार्डन में ‘दि स्टूडियो’ नाम से वियतनामी रेस्त्रां मौजूद हैं। हाल के वर्षों में ‘नुका विस्ट्रो’, ‘जुस ताबेरू’, ‘बाइ दि मेकांग’ और ‘‌वियत-ए-मैन’ जैसे रेस्त्रां भी प्रकट हुए हैं। द सेंट रेजिस होटल जैसा फाइव स्टार होटल भी अब वियतनामी फूड परोसने लगा है।
इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, पर्यटन उद्योग, खनन, शिक्षा, योग संस्थान और नागरिक विमानन उपक्रमों में काम करते वियतनाम की हो ची मिन्ह सिटी और हनोई जैसी जगहों पर लगभग ८,००० भारतीय प्रवासी रहने लगे हैं, पर भारत में वियतनामियों की तादाद अभी केवल ८०० से १,००० के बीच होगी। वियतनाम भारत में रहने वाले सबसे छोटे विदेशी समुदायों में से एक है। यह उपस्थिति मुख्यत: शिक्षा, बौद्ध धर्म, राजनयिक संबंधों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी हुई है। ये मुख्य रूप से बोधगया, नालंदा और सारनाथ जैसे बौद्ध तीर्थस्थलों में धार्मिक अध्ययन और ध्यान के लिए रहते हैं। कई विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं। मुंबई में तो वियतनामियों की तादाद आटे में नमक की मात्रा से भी कम होगी। यहां रहने वाले अधिकांश वियतनामी लोग विदेशी कंपनियों में काम करने वाले पेशेवर, छात्र या भारतीय नागरिकों से विवाह कर बस गए लोग हैं, जिनकी कुल संख्या कुछ दर्जन या सौ के आस-पास ही हो सकती है। मुंबई में वियतनाम का वाणिज्य दूतावास पवई में स्थित है, जहां कुछ वियतनामी राजनयिक और अधिकारी सपरिवार रहते हैं।
दोस्ती की बढ़ती पेंग
कुछ वक्त पहले फिल्मकार राहत शाह काजमी की ‘लव इन वियतनाम’ फिल्म आई है। हो ची मिन्ह विश्वविद्यालय में २००० से हिंदी पढ़ाई जा रही है और हिंदी वियतनामी कोश भी है। भारत और वियतनाम के बीच संबंध अत्यंत मधुर, गहरे और ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत हैं। वर्तमान में वियतनाम भारतीय पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा और सबसे तेजी से उभरता हुआ पर्यटक ठिकाना है। २०२५ में ७,४६,००० भारतीयों ने वियतनाम की यात्रा की। मई, २०२६ में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्तों को पारंपरिक सहयोग से परे रक्षा, तकनीक, व्यापार, वैश्विक रणनीति के आयाम की साझेदारी तक ले जाने का पैâसला किया है। हमारा देश वियतनाम की सेना को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देता है। हमने वियतनाम को अपनी मिसाइल कार्वेट आईएनएस कृपाण उपहार में दी है और अब ब्रह्मोस मिसाइल भी दे रहे हैं। दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यास न्न्घ्र्‍ँर्Aें भी करते हैं। दोनों देशों ने १६.४ बिलियन अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को २०३० तक २५ बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का नया लक्ष्य रखा है। भारत के यूपीएस और वियतनाम के न्न्गूैंR) को आपस में जोड़ने पर भी सहमति बनी है। चीन पर निर्भरता कम करने के लिए दोनों देश वियतनाम में मौजूद दुर्लभ खनिजों के संयुक्त अन्वेषण और प्रोसेसिंग पर मिलकर काम कर रहे हैं। वियतनाम के औद्योगिक समूह विन फास्ट ग्रुप ने अगले दो वर्षों में महाराष्ट्र में भी शहरी विकास, उद्योग, पर्यटन, अक्षय ऊर्जा और बिजली जैसे क्षेत्रों में साढ़े आठ अरब डॉलर का निवेश करने का निर्णय किया है। अपनी दो इलेक्ट्रिक कारों के बाद वियतनाम जल्द ही भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक स्कूटर भी लांच करने जा रहा है।
(समाप्त)
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

अन्य समाचार