मुख्यपृष्ठस्तंभहनीफनामा : अधूरी फिल्मों की अनकही दास्तान!

हनीफनामा : अधूरी फिल्मों की अनकही दास्तान!

हनीफ जवेरी

फिल्मों की दुनिया में कई बड़ी फिल्मों का निर्माण शुरू हुआ, जिनके विषय, कलाकारों और निर्माण को लेकर दूर-दूर तक चर्चाएं हुर्इं। दर्शकों में उन्हें देखने की उत्सुकता भी कम नहीं थी, लेकिन किसी न किसी कारणवश ये फिल्में पूरी नहीं हो सकीं। नतीजा यह हुआ कि सिनेमा प्रेमी उन फिल्मों का आनंद उठाने से महरूम रह गए। आज यह एहसास जरूर होता है कि यदि ये फिल्में रुपहले पर्दे तक पहुंचतीं तो शायद भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपना एक अलग स्थान बना सकती थीं।
कुछ ऐसी अधूरी फिल्मों का जिक्र यहां करना जरूरी है! कमाल अमरोही जैसे दिग्गज निर्देशक का सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ फिल्म `मजनूं’ के लिए जुड़ना ही इस बात का प्रमाण था कि यह एक असाधारण फिल्म होगी। राजेश और परवीन बॉबी को लेकर बनाई जा रही यह फिल्म केवल सात रील तक ही बन पाई थी कि तभी खन्ना और उनकी पत्नी डिंपल कपाड़िया के बीच तनाव बढ़ने लगा। अब चूंकि इस फिल्म के निर्माता डिंपल के पिता चुन्नीलाल कपाड़िया थे, इसलिए सीधा असर ‘मजनूं’ की प्रगति पर पड़ा और यह फिल्म हमेशा के लिए बंद होकर रह गई। जाने-माने नेता रजनी पटेल के सहायक सॉलिसिटर किशोर शर्मा उस समय ग्लैमर वर्ल्ड से प्रभावित हुए, जब वे मीना कुमारी के कानूनी मामलों को संभालने लगे। किशोर को फिल्म निर्माण का अनुभव नहीं था, फिर भी उन्होंने ऐतिहासिक फिल्म ‘चाणक्य चंद्रगुप्त’ बनाने की योजना बना ली। फिल्म के शीर्षक भूमिका के लिए उन्होंने दिलीप कुमार और धर्मेंद्र को अनुबंधित कर लिया। दिलीप की सलाह पर निर्देशन की जिम्मेदारी बी.आर. चोपड़ा को सौंपी गई। चोपड़ा, दिलीप और धर्मेंद्र का यह अनोखा संयोजन इस फिल्म को बेहद विशेष बना रहा था। दिलीप कुमार इस विषय को लेकर बहुत उत्साहित थे। अपने किरदार के लिए उन्होंने अपना सिर तक मुंडवा लिया था। लेकिन धीरे-धीरे फाइनेंशियल समस्याएं सामने आने लगीं!हालांकि, फिल्म शुरू होते ही ज़बरदस्त चर्चा में आ गई और सिने प्रेमियों को इसके प्रदर्शन का बेसब्री से इंतजार होने लगा था। लेकिन निर्माता किशोर शर्मा आगे की शूटिंग के लिए रुपयों का प्रबंध नहीं कर पाए। नतीजा, इतनी बड़ी फिल्म हमेशा के लिए बंद कर दी गई। ३ अक्टूबर १९८० को बहुचर्चित मल्टीस्टारर फिल्म `एक दो तीन चार’ का मुहूर्त संपन्न हुआ। निर्माता जया चक्रवर्ती और निर्देशक विजय आनंद की इस फिल्म में पहली बार देव आनंद, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, ऋषि कपूर, हेमा मालिनी, राखी, परवीन बॉबी और टीना मुनीम एक साथ काम करने वाले थे। फिल्म की पटकथा सलीम-जावेद ने लिखी थी, जबकि संगीत आर.डी. बर्मन का था।
फिल्म की शुरुआत ही हुई थी कि विनोद खन्ना ने फिल्मों से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उनकी जगह शशि कपूर को लिया गया, लेकिन विनोद के इस तरह फिल्म छोड़ने से कलाकारों की संयुक्त तारीखों का पूरा तालमेल बिगड़ गया। हालांकि, फिल्म के अधिकार खरीदने के लिए वितरकों ने जया चक्रवर्ती से संपर्क करना शुरू कर दिया था। लेकिन जया को भारी नुकसान उठाकर यह फिल्म बंद करनी पड़ी। सुभाष घई जैसे प्रतिष्ठित निर्देशक और अमिताभ बच्चन जैसे मेगास्टार यदि साथ काम करने के लिए राजी हों, तो जाहिर है कि वह फिल्म साधारण नहीं हो सकती थी। लोगों में उस फ़िल्म के प्रदर्शन का बेसब्री से इंतजार होना स्वाभाविक था। ऐसा ही तब हुआ, जब सुभाष घई ने अमिताभ के साथ फिल्म देवा बनाने की घोषणा की। फिल्म शुरू हुए अधिक समय नहीं बीता था कि घई और बच्चन के बीच अहंकार का टकराव हो गया। नतीजतन, घई ने यह फिल्म हमेशा के लिए बंद कर दी। ऐसी सैकड़ों फिल्में हैं, जो पूरी न हो सकीं, लेकिन अधूरी रह जाने के बावजूद आज भी याद की जाती हैं।

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