-चीन-तुर्किये के भारी परिवहन विमान पाकिस्तानी एयरबेस पर उतरे; ड्रोन और हथियार पहुंचने का दावा, लेकिन ‘युद्ध की तैयारी’ कहना अभी जल्दबाजी
पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर चीन और तुर्किये के सैन्य परिवहन विमानों की असामान्य आवाजाही ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचा है। अंकित अवस्थी के वीडियो में इसी गतिविधि को पाकिस्तान के संभावित ‘हाई अलर्ट’ और किसी बड़ी सैन्य तैयारी से जोड़कर देखा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों की पड़ताल से इतना तो पुष्ट होता है कि करीब ६० घंटे की अवधि में चीन और तुर्किये से जुड़े सैन्य परिवहन विमानों की पाकिस्तान में आवाजाही दर्ज की गई, लेकिन वे लगातार ६० घंटे हवा में उड़ते रहे-यह निष्कर्ष सही नहीं होगा। ‘६० घंटे’ दरअसल उस अवधि को दर्शाता है जिसमें कई उड़ानें और सैन्य गतिविधियां रिपोर्ट हुर्इं।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी भारी सैन्य परिवहन विमानों को रावलपिंडी के पास नूर खान एयरबेस और कराची के मसरूर एयरबेस पर उतरते देखा गया। तुर्किये का सैन्य परिवहन विमान टीयूएएफ-५२६ भी इस गतिविधि में शामिल बताया गया है। स्वतंत्र विमान ट्रैकिंग डेटाबेस इंटेलस्काई में १८ और १९ अगस्त को तुर्की वायुसेना के एयरबस ए-४००एम, कॉलसाइन टीयूएएफ-५२६ की गतिविधि दर्ज है। इससे कम-से-कम तुर्की सैन्य विमान की मौजूदगी वाले दावे को अतिरिक्त आधार मिलता है।
क्या विमानों में हथियार और ड्रोन आए?
यहीं से तथ्य और अनुमान अलग हो जाते हैं। सुरक्षा सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया है कि विमानों के जरिए ड्रोन, सैन्य उपकरण और अन्य रक्षा सामग्री लाई गई हो सकती है। लेकिन चीन, तुर्किये या पाकिस्तान की ओर से अभी सार्वजनिक तौर पर यह पुष्टि नहीं की गई है कि इन उड़ानों में वास्तव में कौन-सा हथियार या कितनी सैन्य सामग्री लाई गई। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट भी स्पष्ट रूप से कहती है कि विमानों के वास्तविक कार्गो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ‘चीन-तुर्किये ने पाकिस्तान को भारी हथियार पहुंचा दिए’ को फिलहाल स्थापित तथ्य के बजाय सुरक्षा सूत्रों पर आधारित दावा माना जाना चाहिए।
इसके बावजूद गतिविधि को सामान्य मानकर खारिज करना भी मुश्किल है। पाकिस्तान पहले से चीनी जेएफ-१७ लड़ाकू विमान, एचक्यू-९ वायु रक्षा प्रणाली और कई चीनी तथा तुर्की ड्रोन प्रणालियों का उपयोग करता है। इसलिए सैन्य एयरलिफ्ट के जरिए स्पेयर पार्ट्स, गोला-बारूद, ड्रोन या अन्य उपकरण पहुंचना रणनीतिक दृष्टि से संभव है।
इसके साथ ही पाकिस्तान ने भारतीय पंजीकृत नागरिक और सैन्य विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध २४ सितंबर २०२६ तक बढ़ा दिया है। हालांकि यह प्रतिबंध अप्रैल २०२५ से लगातार बढ़ाया जाता रहा है, इसलिए इसे अकेले वर्तमान सैन्य एयरलिफ्ट का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
भारत के लिए असली चिंता क्या?
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि पाकिस्तान ‘कल युद्ध करने वाला है’ या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या चीन-पाकिस्तान-तुर्किये के बीच सैन्य लॉजिस्टिक्स का नया त्रिकोण तेजी से मजबूत हो रहा है?
यदि ६० घंटे में हुई उड़ानें वास्तव में हथियारों और ड्रोन की बड़े पैमाने पर आपूर्ति थीं, तो यह पाकिस्तान की तेजी से सैन्य भंडार भरने की क्षमता का संकेत हो सकता है। लेकिन उपलब्ध सार्वजनिक प्रमाण अभी युद्ध की तत्काल तैयारी सिद्ध नहीं करते।
पैâक्ट-चेक निष्कर्ष: सैन्य विमानों की असामान्य गतिविधि-पुष्ट/मजबूत संकेत। लगभग ६० घंटे का एयरलिफ्ट विंडो-रिपोर्टों से समर्थित। तुर्की ए-४००एम की गतिविधि-फ्लाइट ट्रैकिंग से समर्थित। ड्रोन और हथियारों की निश्चित डिलिवरी-अभी स्वतंत्र रूप से अपुष्ट। पाकिस्तान तत्काल युद्ध की तैयारी में है-फिलहाल अनुमान।
यानी वीडियो जिस गतिविधि की ओर संकेत करता है उसका मूल आधार वास्तविक दिखाई देता है, मगर ‘६० घंटे तक लगातार उड़ते रहे सैन्य विमान’ अथवा ‘युद्ध बस शुरू होने वाला है’ जैसी व्याख्या उपलब्ध तथ्यों से आगे निकल जाती है।
इसी समय ७५० किलोमीटर का नोटिस भी क्यों?
मामला इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि १९-२० अगस्त के आसपास पाकिस्तान द्वारा लगभग ७५० किलोमीटर क्षेत्र से जुड़े हवाई प्रतिबंध की खबर भी सामने आई। इससे फतह शृंखला की किसी मिसाइल के परीक्षण की अटकलें शुरू हुर्इं। लेकिन उपलब्ध नोटिस किसी विशेष मिसाइल का नाम नहीं लेता, इसलिए ‘फतह-३ का परीक्षण तय है’ कहना प्रमाणित तथ्य नहीं है। पाकिस्तान इससे पहले अप्रैल २०२६ में फतह-२ का प्रशिक्षण प्रक्षेपण कर चुका है और सितंबर २०२५ में ७५० किलोमीटर रेंज वाली फतह-४ क्रूज मिसाइल का परीक्षण कर चुका है।
