राजन पारकर
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों तीन तस्वीरें एक साथ दिखाई दे रही हैं। सत्ता को विपक्ष से डर, व्यवस्था पर कानून-व्यवस्था के सवाल और सरकारी योजनाओं के पैसों पर उठती उंगलियां। कांग्रेस नेता नाना पटोले का दावा है कि भाजपा राहुल गांधी के बढ़ते प्रभाव से घबरा गई है और सत्ता जाने की आहट महसूस कर रही है। दूसरी ओर, मुंबई में नाबालिग छात्रा से कथित अनुचित व्यवहार के मामले ने शिक्षक और छात्र के रिश्ते की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वहीं आरटीआई से सामने आई जानकारी के अनुसार ‘लाडली बहन’ योजना में बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थियों को भुगतान होने का दावा किया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन तीनों घटनाओं का अलग-अलग असर जरूर है, लेकिन सवाल एक ही है, सत्ता के गलियारों में जवाबदेही आखिर किसकी है?
राहुल गांधी का डर या सत्ता जाने की आहट?
राजनीति बड़ी अजीब चीज है। जब विरोधी कमजोर हो तो उसकी सभा में कितने लोग आए, इसकी गिनती होती है; और जब विरोधी मजबूत दिखाई देने लगे तो उसकी सभा रोकने की वजह खोजी जाती है! कांग्रेस नेता नाना पटोले ने दावा किया है कि भाजपा राहुल गांधी से डर रही है और इसी वजह से उनके कार्यक्रमों का विरोध किया जा रहा है। पटोले का कहना है कि महाराष्ट्र सहित तीन राज्यों में ऐसा माहौल देखने को मिला है और भाजपा को अब यह एहसास हो चुका है कि जनता का विश्वास उसके हाथ से निकल रहा है। अब पटोले का दावा राजनीतिक हमला है या जमीन पर बदलते समीकरणों का संकेत, इसका फैसला जनता करेगी। लेकिन राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी जरूर शुरू हो गई है कि जिस राहुल गांधी को कभी राजनीतिक रूप से कमजोर बताने की कोशिश की जाती थी, उन्हीं के कार्यक्रमों को लेकर इतनी बेचैनी क्यों?
गुरु की मर्यादा पर कलंक?
गुरु को भारतीय परंपरा में ज्ञान और संस्कार का प्रतीक माना गया है। लेकिन जब उसी रिश्ते की मर्यादा पर सवाल खड़ा हो जाए, तो मामला सिर्फ एक व्यक्ति के आचरण तक सीमित नहीं रहता। पूरी व्यवस्था आईने के सामने खड़ी हो जाती है। मुंबई के विलेपार्ले-पूर्व इलाके में १६ वर्षीय छात्रा के साथ ४७ वर्षीय शिक्षक द्वारा कथित अनुचित व्यवहार का मामला सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने शिक्षक गणेश देवळूखकर को गिरफ्तार किया है और भारतीय न्याय संहिता तथा झ्ध्ण्एध् कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बहनों के नाम पर किसकी मौज?
महाराष्ट्र की ‘लाडली बहन’ योजना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण योजना रही है। सरकार इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का आधार बताती है और पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। लेकिन अब आरटीआई से सामने आई जानकारी ने योजना के प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दावे के अनुसार, जून २०२६ तक करीब ९२ लाख अपात्र लाभार्थियों के खातों में लगभग ९,६०५ करोड़ रुपए ट्रांसफर हुए। अपात्रता के कारणों में ई-केवाईसी का अभाव, आय का सीमा से अधिक होना, सरकारी कर्मचारी होना या एक ही परिवार से अनेक आवेदन जैसी बातें बताई जा रही हैं।
