मुख्यपृष्ठनए समाचारफडणवीस सरकार में ड्रग्स केस का महाजाम!

फडणवीस सरकार में ड्रग्स केस का महाजाम!

-४,७४७ मुकदमें पेंडिंग, एक कोर्ट में ताला
-पुलिस पकड़े, कोर्ट तारीख दे, माफिया जमानत पर धंधा करें

फिरोज खान / मुंबई
राज्य सरकार की लापरवाही का सबसे बड़ा खामियाजा मुंबई की न्याय व्यवस्था भुगत रही है। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के ४,७४७ केस कोर्ट में धूल खा रहे हैं, जिसमें १९८९ का केस भी शामिल है। ४ स्पेशल एनडीपीएस कोर्ट हैं, उनमें से भी १ कोर्ट पिछले २ महीने से खाली पड़ी है। नतीजा पुलिस परेशान, वकील परेशान और ड्रग्स माफिया जमानत पर घूमकर फिर से धंधे में लग गए हैं। सरकार नशामुक्ति की बड़ी-बड़ी बातें करती है। लेकिन जब कोर्ट ही खाली रखेगी, जज ही नहीं देगी, तो एनसीबी-पुलिस की मेहनत का क्या मतलब? ड्रग्स केस में देरी मतलब ड्रग्स माफिया को खुला लाइसेंस। सरकार को तुरंत ४ नई एनडीपीसी कोर्ट शुरू करनी चाहिए, नहीं तो ४,७४७ का आंकड़ा १०,००० होते देर नहीं लगेगी। इस महीने ४३ वकीलों ने मुंबई हाई कोर्ट के गार्डियन जज जस्टिस एम.एस. कार्णिक और जस्टिस नीला गोखले को पत्र लिखा है। पत्र में मांग साफ है कि कोर्ट की संख्या ४ से ८ करो।
वकीलों ने पत्र में लिखा है कि हर कोर्ट में रोज ६० केस लगते हैं, लेकिन महीने में २ केस भी पूरे निपट नहीं पाते। क्योंकि जज को जमानत, रिमांड और दूसरी अर्जियां भी देखनी पड़ती हैं। ४,७४७ में से सिर्फ ५०९ में ट्रायल शुरू हुआ है। एक कोर्ट तो सरकार ने २ महीने से खाली छोड़ रखी है, जज ही नियुक्त नहीं किया।
पुलिस की मेहनत पर पानी, वकीलों की आफत
हर हफ्ते एनसीबी, डीआरआई, कस्टम, एंटी नारकोटिक्स सेल और लोकल पुलिस १५-१६ नए ड्रग्स केस दर्ज करती है। पुलिस रात-रात भर छापे मारती है, माल पकड़ती है, आरोपी को पकड़ती है। लेकिन कोर्ट में तारीख पर तारीख।

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