मुख्यपृष्ठधर्म विशेषअभयं प्रसादं शक्तिं शूलं खट्वाङ्गमीश्वर:

अभयं प्रसादं शक्तिं शूलं खट्वाङ्गमीश्वर:

शीतल अवस्थी

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव काल के भी काल यानी महाकाल के स्वरूप में भी पूजनीय हैं। खासतौर पर शाम का वक्त शिव का होता है। माना जाता है कि इस वक्त वे अपने भूत-गणों के साथ भ्रमण पर निकलते हैं। इसलिए इस शुभ घड़ी को सांसारिक प्राणियों के लिए शिव कृपा पाने के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है। इंसान की स्वाभाविक भावना भी सुखों के साथ जीने की ही होती है, जिसके लिए देव स्मरण भी बेहतर उपाय माना जाता है। धर्म ग्रंथों के मुताबिक, फिर महादेव का स्मरण तो जीवन का कल्याण ही करता है, यानी भक्त को मनचाहा लाभ व सुख मिलता है। हिंदू धर्म परंपराओं में शिव स्मरण का ऐसा ही मंगलमय काल सावन महीना माना जाता है, जिसकी हर शाम यानी दिन-रात के मिलन की घड़ी प्रदोष काल और रात्रि पर शिव भक्ति मंगलकारी मानी गई है। शिव के स्वामित्व के शुभ काल सावन सोमवार को अगर जीवन में काम, समय और संबंधों में हानि से बचना चाहते हैं तो शिव मंत्रों का ध्यान हर तरह से लाभ व सौभाग्य देने वाला साबित होगा। शाम को शिवलिंग का जल स्नान कराने के बाद पंचोपचार पूजा यानी सफेद चंदन, अक्षत, बिल्वपत्र, आंकडे के फूल व मिठाई का भोग लगाकर इस आसान शिव मंत्र का ध्यान जीवन में शुभ-लाभ की कामना से करें व धूप, दीप व कर्पूर आरती करें। यह मंत्र शिव के कल्याणकारी स्वरूप का ध्यान है, जो मृत्युभय, दरिद्रता व हानि से रक्षा करने वाले माने गए हैं।
पञ्चवक्त: कराग्रै: स्वैर्दशभिश्चैव धारयन्।
अभयं प्रसादं शक्तिं शूलं खट्वाङ्गमीश्वर:।।
दक्षै: करैर्वामकैश्च भुजंग चाक्षसूत्रकम्।
डमरूकं नीलोत्पलं बीजपूरकमुक्तमम्।।
पौराणिक मान्यता यह भी है कि सावन में ही शिव ने सागर मंथन से निकले हलाहल (विष) को पीकर प्रतीकात्मक रूप से जगतकल्याण व सहिष्णुता के भावों का महत्व बताया। इसी काल में शास्त्रों में मानसिक संताप, अशांति और बेचैनी को दूर रखने और घर में फैले कलह से छुटकारा पाने के लिए ही कुछ विशेष शिव मंत्र के जप का महत्व बताया गया है। खास तौर पर सावन के हर सोमवार को शिव भक्ति के विशेष दिन तो यह शिव मंत्र समृद्धि, ऐश्वर्य की कामना के साथ शांति की कामना भी पूरी करने वाला माना गया है। यह पौराणिक विशेष शिव मंत्र, जिसे शिवालय या घर के देवालय में शिव को गंध, अक्षत, फूल, धूप व दीप से पूजा कर मन ही मन बोलना सुख-शांति की कामना पूरी करने वाला बताया गया है-
नमो रुद्राय महते सर्वेशाय हितैषिणे।
नंदीसंस्थाय देवाय विद्याभयकराय च।।
पापांतकाय भर्गाय नमोनंताय वेधसे।
नमो मायाहरेशाय नमस्ते लोकशंकर।।

अन्य समाचार