सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मनमाने और घोटालेबाज कामकाज के खिलाफ चुनाव आयोग के भीतर बगावत हो गई है। यह अंदरूनी कलह सामने आने के बाद पूरे हिंदुस्थान में गुस्से की लहर दौड़ पड़ी है। `इलेक्शन कमीशन चोर है’ के नारे लगाते हुए जगह-जगह लोग सड़कों पर उतर पड़े हैं। देश भर से एक स्वर में यह मांग उठ रही है कि एसआईआर सबसे बड़ा घोटाला है और ज्ञानेश कुमार इसके सूत्रधार हैं। इस देशद्रोही व्यक्ति को तुरंत पद से हटाया जाए।
ये लोकतंत्र की हत्या है
ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो!
वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में ही कोहराम मच गया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं। दोनों चुनाव आयुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैâसले से नाराज हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के बिना जानकारी दिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पैâसले लिए। इस खुलासे के बाद कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने मोदी सरकार और ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। विपक्ष ने एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। वहीं कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को अपने बॉस मोदी की तरह तानाशाही करने और ‘वोट चोरी’ का आरोप फिर लगाया है।
खुलासे के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि आज दोपहर १ बजे, आईएनसी की ओर से मेरे सहयोगी डॉ. अभिषेक सिंघवी मीडिया से विस्तार से बात करेंगे। वे एक प्रमुख राष्ट्रीय अखबार में हुए उन सनसनीखेज खुलासों पर चर्चा करेंगे, जिनमें बताया गया है कि वैâसे सीईसी ने भारत के चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को खत्म कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, `मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं।
`आप बच नहीं सकते’
राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर सीधा हमला बताया। उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर इसे आयोजित करने का आरोप लगाते हुए इसे ‘देशद्रोह’ करार दिया और कहा कि न्याय होगा। अब समय बदलेगा, हम आपको पकड़ लेंगे। आप बच नहीं सकते।
चुनाव आयोग का `वीआईपी बचाओ’ अभियान!
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनावी प्रक्रिया में कथित दोहरे मापदंड का मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स कलेक्टिव की जांच के मुताबिक, आम मतदाताओं को दस्तावेज, नोटिस और सुनवाई की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, वहीं मंत्रियों, उनके परिवारों, न्यायाधीशों, अधिकारियों, आईएएस-आईपीएस, सेलिब्रिटी और अन्य प्रभावशाली लोगों को ‘वीआईपी’ के रूप में चिह्नित कर उन्हें अलग सुविधा देने की व्यवस्था की गई। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होने वाले ऐप में ‘मार्क वीआईपी’ मॉड्यूल जोड़ा गया।
