मुख्यपृष्ठधर्म विशेषगाय को चारा खिलाने से प्रसन्न होते हैं पितर

गाय को चारा खिलाने से प्रसन्न होते हैं पितर

 शीतल अवस्थी

-विस्तृत श्राद्ध संभव न हो तो पूर्वजों का स्मरण कर करें गौसेवा; पहली रोटी और हरा चारा देने की परंपरा

सनातन धर्म में गाय को पूजनीय और देवताओं का निवास माना गया है। पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध के भोजन का पहला अंश गाय के लिए निकालने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि पूर्वजों का स्मरण करके गाय को भोजन कराने से पितरों को तृप्ति मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

जो व्यक्ति आर्थिक, स्वास्थ्य या अन्य कारणों से विधिवत श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन अथवा पिंडदान नहीं कर सकता, वह श्रद्धापूर्वक गाय को चारा खिलाकर अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर सकता है।

गौसेवा की सरल विधि

प्रातः स्नान करके पूर्वजों का ध्यान करें। गाय के लिए ताजा हरा चारा, गुड़ के साथ रोटी अथवा घर में बनी सादी रोटी रखें। भोजन गाय के स्वास्थ्य के अनुकूल और ताजा होना चाहिए।

गाय को भोजन देने से पहले मन में कहें—

“यह अन्न मैं अपने ज्ञात-अज्ञात पितरों की तृप्ति के लिए अर्पित कर रहा हूं। मेरे पूर्वज इसे स्वीकार करें और परिवार को सद्बुद्धि तथा सुख-शांति का आशीर्वाद दें।”

इसके बाद गाय को भोजन खिलाएं और संभव हो तो उसकी परिक्रमा करके प्रणाम करें। इस दौरान सरल मंत्र बोला जा सकता है—

ॐ सर्वदेवमये देवि लोकानां शुभनन्दिनि।
मातर्ममाभिलषितं सफलं कुरु नन्दिनि॥

पहली रोटी गाय के लिए

पितृपक्ष में दोपहर का भोजन तैयार होने के बाद पहली रोटी गाय के लिए निकालना शुभ माना गया है। इसी प्रकार भोजन के कुछ अन्य भाग कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए निकाले जाते हैं। इसे पंचबलि परंपरा से जोड़ा जाता है।

इन बातों का ध्यान रखें

* गाय को प्लास्टिक की थैली में भोजन न दें।
* बासी, फफूंद लगा, अत्यधिक मसालेदार या खराब भोजन न खिलाएं।
* केवल रोटी पर निर्भर रखने के बजाय हरा चारा देना बेहतर है।
* सड़क के बीच गाय को भोजन न दें; इससे दुर्घटना का खतरा हो सकता है।
* संभव हो तो किसी विश्वसनीय गोशाला में चारा, पानी या उपचार के लिए सहयोग करें।

गौसेवा का अर्थ केवल धार्मिक कर्म पूरा करना नहीं है। गाय को स्वच्छ भोजन, पानी, आश्रय और चिकित्सा उपलब्ध कराना वास्तविक सेवा है। साथ ही माता-पिता, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों की देखभाल करना भी पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा माना गया है।

अन्य समाचार