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रात के अंधेरे में मंत्री का खेत निरीक्षण!

-विपक्ष का तंज-राहत देने के बजाय दिखावे का दौरा, क्या कोजागीरी मनाने पहुंचे हैं?

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र में सूखे की मार से जनता परेशान है। आपदा की इस घड़ी में किसान सरकार से तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में सरकार के मंत्री रात में खेतों का निरीक्षण करने निकल रहे हैं। हालांकि, उनके दौरे के समय को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। दिन के उजाले में खेतों की वास्तविक स्थिति देखने के बजाय शाम और रात में फसल निरीक्षण का कार्यक्रम तय किए जाने पर किसान संगठनों और विपक्ष ने आपत्ति जताई है।
राज्य के राजस्व मंत्री तथा सूखा निवारण मंत्रिमंडल उपसमिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुळे शनिवार को वर्धा और यवतमाल के सूखाग्रस्त क्षेत्रों के दौरे पर हैं। शाम ५ बजे वर्धा जिले के रत्नापुर में निरीक्षण के बाद शाम ७ बजे यवतमाल जिले के नरसापुर में फसल निरीक्षण का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसी दौरे को लेकर पूर्व शिक्षा मंत्री वसंतराव पुरके ने सरकार पर तीखा हमला बोला। पुरके ने सवाल किया कि शाम ७ बजे खेतों में पहुंचकर मंत्री आखिर सूखे और फसल नुकसान की वास्तविक स्थिति कितनी देर देख पाएंगे? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि यह किसान की बर्बाद फसल का निरीक्षण है या कोजागीरी पूर्णिमा मनाने का कार्यक्रम? उन्होंने सरकार से कहा कि केवल दौरे और घोषणाओं से किसानों का संकट दूर नहीं होगा। पहले किसानों के खातों में सहायता की राशि जमा की जाए और आश्वासन देने के बजाय उन्हें ठोस राहत दी जाए। विपक्ष का आरोप है कि सूखे की स्थिति गंभीर होने के बावजूद किसानों को अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिली है। विपक्ष ने सरकार से तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और किसानों की समस्याओं पर ठोस कदम उठाने की मांग की है।
बुलढाणा में भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
इसी बीच बुलढाणा में शिवसेना ने सूखे को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार के सूखे संबंधी शासनादेश की प्रतियां जलाकर विरोध जताया। पार्टी प्रवक्ता जयश्री शेलके के नेतृत्व में हुए आंदोलन के दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। इसके बाद पुलिस ने शेलके समेत प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। विपक्ष और किसान संगठनों की ओर से सरकार के दौरों के साथ-साथ तत्काल राहत और सहायता की मांग की जा रही है। ऐसे में अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि सूखे की स्थिति का आकलन करने के साथ किसानों तक राहत कितनी जल्दी पहुंचाई जाती है।

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