-महायुति सरकार पर भड़का विपक्ष
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की जनता पहले महंगाई से परेशान थी अब सूखे ने आम जनता की कमर तोड़ दी है और किसान आर्थिक बदहाली से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महायुति सरकार एक लाख करोड़ रुपए के प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग को लेकर अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं है। जिसे लेकर विपक्ष सरकार पर आक्रामक हो गया है। आपदा में लोगों की मदद करने के बजाय उनकी जमीन पर कब्जा करने की पूरी कोशिश में महायुति सरकार लगी है। ऐसा गंभीर आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता सतेज पाटील और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता जयंत पाटील ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
दोनों नेताओं ने सवाल उठाया कि जब राज्य आर्थिक संकट, सूखे और महंगाई से जूझ रहा है, तब इतनी भारी रकम खर्च करने वाले इस महामार्ग की आखिर क्या जरूरत है? किसानों की सहमति और जनहित को दरकिनार कर इस परियोजना को उन पर जबरन क्यों थोपा जा रहा है?
८६ हजार करोड़ से बढ़कर एक लाख करोड़ पहुंची लागत
सतेज पाटील ने परियोजना की उपयोगिता और लगातार बढ़ती लागत पर सवाल उठाते हुए कहा कि शक्तिपीठ महामार्ग का शुरुआती खर्च ८६ हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। केवल जमीन अधिग्रहण पर ही २८ हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन वित्तमंत्री ने इस परियोजना को गैरजरूरी बताया था। इसके बावजूद सरकार किसके हितों के लिए इस पर अड़ी हुई है?
