मुख्यपृष्ठनए समाचार`कौन भारतीय नागरिक है, यह तय करना आयोग का काम नहीं'

`कौन भारतीय नागरिक है, यह तय करना आयोग का काम नहीं’

-नागरिकता तय करने के अधिकार पर पूर्व जस्टिस ओका की दो टूक टिप्पणी
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अभय एस. ओका ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग की अधिकार-सीमा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कौन भारतीय नागरिक है, यह तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है। जस्टिस ओका ने मई २०२६ में एसआईआर की संवैधानिक वैधता बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत बताई है।
जस्टिस ओका के मुताबिक, केवल गणना फॉर्म नहीं भरने के आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची से सीधे हटाना उचित नहीं है। कानून के तहत संबंधित व्यक्ति को नोटिस देने, उसका पक्ष सुनने और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी निर्वाचन क्षेत्रों में एक साथ एसआईआर कराने के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-६ और विवरण में सुधार के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-८ में अतिरिक्त घोषणाएं जोड़ने के चुनाव आयोग के अधिकार पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, इन नियमों और फॉर्मों में बदलाव निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप ही किया जा सकता है। जस्टिस ओका ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर की संवैधानिक वैधता बरकरार रहने का अर्थ चुनाव आयोग को मनमानी की छूट मिलना नहीं है। नागरिकता का निर्धारण और मतदाता सूची का पुनरीक्षण अलग-अलग विषय हैं। ऐसे में नागरिकता साबित नहीं कर पाने के आधार पर मतदाता का नाम हटाने से पहले कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

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