मुख्यपृष्ठस्तंभपटना की पॉलिटिक्स : अब अमित प्रकाश पर भी गिरी गाज!

पटना की पॉलिटिक्स : अब अमित प्रकाश पर भी गिरी गाज!

अरुण कुमार गुप्ता

बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के मामले में एक और कार्रवाई की है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह के निष्कासन के बाद अब युवा जदयू के प्रदेश सचिव अमित प्रकाश को भी छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है और उन्हें प्रदेश सचिव के पद से भी मुक्त कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमित प्रकाश पर पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए समर्थित जदयू उम्मीदवार के खिलाफ काम करने और दूसरे दल के प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने का आरोप था। युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष नीतीश पटेल ने यह कार्रवाई की। पार्टी के आदेश में उनकी सदस्यता समाप्त करने और छह साल के निष्कासन का फैसला दर्ज किया गया है। इस चुनाव में जदयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था। ऐसे में पार्टी के किसी पदाधिकारी का दूसरे प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करना नेतृत्व के लिए संगठनात्मक अनुशासन का सवाल बन गया। हालांकि, अमित प्रकाश का पक्ष और उनकी ओर से आरोपों पर कोई जवाब उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है।
जदयू में नेतृत्व की गद्दी पर सस्पेंस बरकरार!
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के बाद जनता दल (यूनाइटेड) की कमान कौन संभालेगा, यह सवाल अब महज भविष्य की अटकल नहीं रह गया है। निशांत कुमार की सक्रिय राजनीतिक भूमिका और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बयानों ने इस चर्चा को नई धार दे दी है। जदयू कार्यालय में निशांत के समर्थन में नारे लगाए जाने की खबरों ने भी राजनीतिक हलकों में उत्तराधिकार की बहस को हवा दी। हालांकि, पार्टी ने उन्हें अगला मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है। निशांत कुमार ने मार्च २०२६ में जदयू की सदस्यता लेकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी और संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ी। जून में जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के दौरान पार्टी नेताओं ने निशांत को भविष्य में बड़ी भूमिका देने की बात कही थी। इससे यह संकेत जरूर मिला कि पार्टी नेतृत्व उन्हें आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है। लेकिन राजनीतिक विरासत और संगठन की कमान संभालना दो अलग बातें हैं। नीतीश कुमार ने वर्षों में अपना अलग राजनीतिक आधार और प्रशासनिक पहचान बनाई है। निशांत के सामने चुनौती केवल उस विरासत से जुड़ने की नहीं, बल्कि संगठन के कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं और आम मतदाताओं के बीच अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित करने की भी होगी।
अनंत सिंह की खुली चुनौती!
जदयू ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया, लेकिन इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक टकराव थमने के बजाय और तेज हो गया है। २५ अक्टूबर को अनंत सिंह ने जदयू के नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि अगला विधानसभा चुनाव आते-आते पार्टी १० से १२ सीटों पर सिमट सकती है। उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने के भी संकेत दिए हैं। उनके बयान ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को २४ अक्टूबर को कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित किया गया था। विवाद की जड़ बिहार विधान परिषद के पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव है। जदयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि अनंत सिंह ने जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया। पार्टी नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता और निर्देशों की अवहेलना माना।

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