-फुल-प्रूफ प्लानिंग फेल, आखिर क्यों और कैसे? सता रहा दिल्ली दरबार का डर!
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने महायुति की नींद उड़ा दी है। राज्य में सत्ता में होने के बावजूद ५ में से ३ सीटों पर महाविकास आघाड़ी ने कब्जा जमाया, जबकि महायुति को महज २ सीटों से संतोष करना पड़ा। सबसे बड़ा झटका भाजपा को अपने मजबूत गढ़, नागपुर, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक क्षेत्रों में मिला। लगातार चुनावी जीत दर्ज कर रही महायुति की फुल-प्रूफ प्लानिंग आखिर कैसे ध्वस्त हो गई, अब इसे लेकर तीखा आत्ममंथन शुरू हो चुका है।
हार की मुख्य वजह महायुति के घटक दलों के भीतर ही भीतर जारी खींचतान और भितरघात मानी जा रही है। भाजपा का सीधा आरोप है कि पुणे और नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में शिंदे सेना के स्थानीय पदाधिकारियों ने पार्टी लाइन के खिलाफ रुख अपनाया, जिससे बने-बनाये समीकरण बिगड़ गए। दूसरी ओर, गठबंधन के सहयोगी दल हार की जिम्मेदारी एक-दूसरे के सिर फोड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर तालमेल की भारी कमी और कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता ने महायुति का बड़ा नुकसान किया, जिसका सीधा फायदा महाविकास आघाड़ी को मिला।
इस करारी हार के बाद भाजपा संगठन में हड़कंप मच गया है। प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण अगले एक-दो दिनों में पुणे और नागपुर के सभी विधायकों व नगरसेवकों की आपात बैठक लेकर कड़ा हिसाब-किताब करने वाले हैं। असली हलचल २ नवंबर को होने वाली बैठक को लेकर है, जब यह मामला सीधे ‘दिल्ली दरबार’ पहुंचेगा।
`नागपुर स्नातक सीट पर भाजपा की हार से सियासी घमासान!’
संघ का गढ़ माने जाने वाले नागपुर में कांग्रेस ने भाजपा को शिकस्त देकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया सियासी संदेश दिया है। नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार की महज ३,२७१ मतों से हार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मुश्किलें बढ़ा दीं। नतीजों से पहले कांग्रेस को लेकर तंज कसने वाले भाजपा नेताओं के सामने परिणाम आने के बाद असहज स्थिति पैदा हो गई। दावा किया जा रहा है कि नतीजों के बीच फडणवीस को अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा। इस घटनाक्रम को लेकर विधायक रोहित पवार ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। रोहित पवार ने कहा कि नागपुर सीट पर फडणवीस ने खुद व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया था। वे बागी उम्मीदवारों को मनाने के लिए घर-घर तक गए, इसके बावजूद संघ के मुख्यालय वाले क्षेत्र में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
