-मनपा में २२५ तबादलों के लिए नेताओं की सिफारिशों की बाढ़
-शिंदे के ९० पत्र; आठवले दूसरे नंबर पर
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई मनपा में अधिकारियों और कर्मचारियों को मनचाहे तथा ‘मलाईदार’ पदों पर तैनाती दिलाने के लिए राजनीतिक सिफारिशों का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी ने मनपा के तबादला तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुलासा हुआ है कि कुल २२५ अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों के लिए मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने सिफारिशें की हैं।
शहर अभियंता कार्यालय द्वारा सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराई गई विस्तृत सूची में राजनीतिक सिफारिशों का पूरा ब्यौरा सामने आया है। आमतौर पर किसी अधिकारी या कर्मचारी के तबादले के पीछे किस राजनीतिक नेता की सिफारिश है, यह सार्वजनिक नहीं किया जाता, लेकिन आरटीआई के जरिए सामने आई इस जानकारी ने मनपा प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूची के अनुसार, २२५ तबादलों के लिए सबसे अधिक ९० सिफारिश पत्र मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से दिए गए हैं। इसके बाद केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ९ सिफारिश पत्रों के साथ दूसरे स्थान पर बताए गए हैं।
मनपा में तबादले प्रशासनिक जरूरत, वरिष्ठता और तय मानदंडों के आधार पर होने चाहिए, लेकिन सामने आई सूची में अधिकारियों और कर्मचारियों के नामों के साथ मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और जनप्रतिनिधियों की सिफारिशें दर्ज हैं। भाजपा, एकनाथ शिंदे गुट और अजीत पवार गुट से जुड़े जनप्रतिनिधियों द्वारा सहायक अभियंता, उप अभियंता, कार्यकारी अभियंता और कनिष्ठ अभियंता जैसे पदों पर कार्यरत अधिकारियों के तबादलों के लिए सिफारिश पत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
स्थिति इतनी दिलचस्प है कि कुछ अधिकारियों के तबादले के लिए एक नहीं, बल्कि दो-दो और तीन-तीन जनप्रतिनिधियों ने सिफारिश की है। अब सवाल उठ रहा है कि जब तबादले की प्रक्रिया नियमों और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर तय होनी चाहिए, तब राजनीतिक सिफारिशों की यह कतार आखिर किस व्यवस्था की ओर इशारा करती है?
तबादलों के लिए दबाव बनाना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
