-बाप्पा को संभालने बढ़े मुस्लिम हाथ
-२० फीट ऊंची गणपति प्रतिमा गिरने से बची
-चार घंटे तक युवकों ने थामे रखा
जेदवी
गणेशोत्सव के दौरान ठाणे के मुंब्रा में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने सांप्रदायिक सौहार्द और हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश कर दी। मुंब्रा के दाभोळकर नाका परिसर में दुर्घटना की स्थिति पैदा होने के बाद स्थानीय मुस्लिम युवकों ने अपनी सूझबूझ और तत्परता से करीब २० फीट ऊंची भगवान गणेश की प्रतिमा को गिरने से बचा लिया। समय रहते की गई इस मदद से एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार, शंकर नगर परिसर में ‘मार्कंडेय सेवा संस्था’ द्वारा तैयार की गई लगभग २० फीट ऊंची गणपति प्रतिमा को ट्रॉली के माध्यम से भिवंडी के पद्मानगर स्थित गणेश पंडाल की ओर ले जाया जा रहा था। देर रात करीब १२ बजे ट्रॉली जैसे ही मुंब्रा के दाभोलकर नाका पहुंची, अचानक उसका एक पहिया टूटकर निकल गया।
पहिया निकलते ही भारी-भरकम प्रतिमा एक तरफ झुक गई और उसके पलटने तथा खंडित होने का खतरा पैदा हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय मुस्लिम युवक तत्काल मदद के लिए आगे आए। आरिफ सैयद, बासिद शेख, साहू सहित अन्य युवकों ने आसपास के लोगों को जुटाया और करीब चार घंटे तक ट्रॉली तथा प्रतिमा को सहारा देकर संभाले रखा।
बाद में मौके पर क्रेन बुलाई गई। युवकों की मदद और सावधानी के साथ गणपति प्रतिमा को सुरक्षित नीचे उतारा गया। प्रतिमा को सुरक्षित करने के बाद इन युवकों ने बाप्पा के सामने श्रीफल अर्पित कर सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश दिया।
मुंब्रा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मुश्किल की घड़ी में धर्म से पहले इंसानियत खड़ी होती है। स्थानीय नागरिकों, पुलिस और नेताओं ने भी इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की है, जबकि सोशल मीडिया पर यह घटना हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की प्रेरक मिसाल के रूप में चर्चा में है।
धर्म से ऊपर इंसानियत का संदेश
मुंब्रा में गणेश प्रतिमा को बचाने आगे आए मुस्लिम युवकों ने सामाजिक सौहार्द की मिसाल कायम की। चार घंटे तक प्रतिमा को संभालने के बाद उन्होंने बप्पा के सामने श्रीफल अर्पित किया। इस घटना ने साफ संदेश दिया कि मुश्किल वक्त में मजहब की दीवारें नहीं, बल्कि इंसानियत और भाईचारा सबसे पहले खड़ा होता है।
