-मीरा-भायंदर मनपा की आर्ट गैलरी के बजट पर उठे गंभीर सवाल
-३९ करोड़ की निविदा, लागत बढ़कर करीब १६० करोड़ पहुंचने पर सवाल
-करीब ४० हजार वर्गफुट की आर्ट गैलरी पर भारी-भरकम खर्च का औचित्य क्या?
-मेहता ने उठाए सवाल, सरनाईक के खिलाफ लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
-लता मंगेशकर नाट्यगृह विवाद के बाद दोनों नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप तेज
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य की महायुति सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। अब मीरा-भायंदर महानगरपालिका में प्रस्तावित आर्ट गैलरी की लागत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब ३९ करोड़ रुपए की परियोजना की लागत बढ़कर लगभग १६० करोड़ रुपए तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। इस भारी-भरकम बजट को लेकर भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने सवाल उठाते हुए खर्च का औचित्य जनता के सामने स्पष्ट करने की मांग की है।
नरेंद्र मेहता ने आर्ट गैलरी की बढ़ी हुई लागत पर सवाल उठाते हुए कहा कि ३९ करोड़ रुपए की परियोजना देखते ही देखते करीब १६० करोड़ रुपए की कैसे हो गई? करीब ४० हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनने वाली इस आर्ट गैलरी पर इतनी बड़ी राशि खर्च करने का औचित्य क्या है? उन्होंने मांग की कि इस संबंध में मनपा प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार लोगों को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
मेहता-सरनाईक की लड़ाई से खुली पोल!
मीरा-भायंदर में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अब नए मुद्दों तक पहुंच गया है। भारतरत्न स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर नाट्यगृह की बदहाली को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने नाट्यगृह की सुविधाएं बंद होने का आरोप लगाते हुए मनपा प्रशासन को घेरा था। अब मेहता ने आर्ट गैलरी की लागत को लेकर सवाल उठाते हुए सरनाईक की भूमिका पर निशाना साधा है।
३९ करोड़ से १६० करोड़ तक कैसे पहुंचा खर्च
गौरतलब है कि मनपा ने आर्ट गैलरी के निर्माण के लिए शुरुआत में करीब ३९ करोड़ रुपए की निविदा जारी की थी। इसके बाद परियोजना की अनुमानित लागत बढ़ते-बढ़ते करीब १६० करोड़ रुपए तक पहुंचने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर परियोजना की लागत में इतना बड़ा इजाफा क्यों हुआ? संशोधित अनुमान किस आधार पर तैयार और मंजूर किया गया? निर्माण में ऐसा क्या बदलाव हुआ, जिससे खर्च कई गुना बढ़ गया? और सबसे अहम सवाल—जनता की गाढ़ी कमाई से जुटाए गए करोड़ों रुपए के अतिरिक्त खर्च का आधार क्या है?
