-लाखों यात्रियों के सब्र का बांध टूटा
-वर्षों की देरी के बाद लाइन-५ और ५ए को मंजूरी
जेदवी / मुंबई
भिवंडी, कल्याण और उल्हासनगर के लाखों नागरिकों को वर्षों से मेट्रो का सपना दिखाया जा रहा है, लेकिन यह सपना जमीन पर उतरने में लगातार देरी का शिकार होता रहा। जमीन अधिग्रहण, पुनर्वास और रूट विवादों ने महत्वाकांक्षी मेट्रो परियोजना की रफ्तार पर ऐसा ब्रेक लगाया कि जनता को वर्षों तक घोषणाओं और आश्वासनों के बीच इंतजार करना पड़ा। अब जाकर केंद्र सरकार ने २९ अगस्त को संशोधित मेट्रो लाइन-५ और विस्तार लाइन-५ए को मंजूरी दी है।
सवाल यह है कि जिस परियोजना को समय पर पूरा होना चाहिए था, उसमें बार-बार संशोधन और विवाद क्यों पैदा हुए? सरकार विकास परियोजनाओं की घोषणा तो जोर-शोर से करती रही, लेकिन जमीन पर काम की रफ्तार ने यात्रियों को निराश किया।
लाइन-५ का बालकुम से भिवंडी के धामणकर नगर तक ११.९ किलोमीटर का पहला चरण करीब ६,७४१.३४ करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा है। छह एलिवेटेड स्टेशनों वाले इस मार्ग को दिसंबर तक शुरू करने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन दूसरा चरण अभी भी मंजूरी, जमीन और निर्माण की लंबी प्रक्रिया से गुजर रहा है।
भिवंडी से कल्याण के दुर्गाडी तक १०.४८ किलोमीटर के दूसरे चरण पर करीब ७,३२६ करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पुनर्वास की जरूरत और भिवंडी बायपास फ्लाईओवर के रूट विवाद के कारण अलाइनमेंट तक बदलना पड़ा। संशोधित योजना में कुछ हिस्सा भूमिगत करने का प्रस्ताव है।
