द्रुप्ति झा / मुंबई
मनपा की मुंबई में विकास के नाम पर अब बच्चों के खेल के मैदानों पर भी नजरें गड़ गई हैं। शहर में पहले ही खुले मैदानों और हरित क्षेत्रों की संख्या लगातार घट रही है, ऐसे में बचे-खुचे खेल के मैदानों को भी विकास के नाम पर कंक्रीट के जंगल में तब्दील करने की कवायद ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मैदानों को लेकर प्रशासन की कथित नीति के खिलाफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मनपा एल विभाग कार्यालय के बाहर आक्रामक रुख अपनाया है और कहा मैदान किसी बिल्डर की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि शहर के बच्चों के भविष्य की अमानत हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल के मैदान बेहद जरूरी हैं, लेकिन मुंबई में लगातार बढ़ते निर्माण के बीच अब इन मैदानों पर भी विकास की तलवार लटकने लगी है। सवाल यह है कि आखिर विकास के नाम पर शहर में बच्चों के लिए बची जगह भी क्यों छीनी जा रही है? एक तरफ मुंबई प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्र की समस्या से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर खुले मैदानों को भी विकास के नाम पर कंक्रीट के हवाले करने की तैयारी हो रही है।
