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राजावाड़ी अस्पताल में डॉक्टरों की भारी किल्लत…एक डॉक्टर के भरोसे ८०० मरीज… वेंटिलेटर पर उपनगर की स्वास्थ्य व्यवस्था

सामना संवाददाता / मुंबई

घाटकोपर स्थित राजावाड़ी अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पूर्वी उपनगरों के गरीब और जरूरतमंद मरीजों की जीवन रेखा माने जाने वाले इस अस्पताल में रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर्स की किल्लत के चलते मौजूदा डॉक्टरों पर अमानवीय कार्यभार आ पड़ा है। ओपीडी में एक डॉक्टर को प्रतिदिन ४०० से ५०० मरीजों की जांच करनी पड़ रही है।
३९ आरएमओ की तत्काल भर्ती की मांग
अस्पताल में आने वाले मरीजों की विशाल संख्या को देखते हुए कम से कम ३९ अतिरिक्त आरएमओ (चिकित्सा अधिकारियों) की तत्काल नियुक्ति की आवश्यकता है। प्रशासन की ढिलाई के कारण रिक्त पदों को न भरे जाने से उपलब्ध डॉक्टरों का मानसिक व शारीरिक तनाव चरम पर पहुंच चुका है।
३ नवजात शिशुओं की मौत से उठा जनाक्रोश
हाल ही में राजावाड़ी अस्पताल में एक ही दिन में तीन नवजात शिशुओं की मौत का दर्दनाक मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से अस्पताल में बदहाल चिकित्सा सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों और मरीज कल्याण समितियों ने मांग की है कि प्रशासन नींद से जागे और तुरंत अतिरिक्त डॉक्टरों की तैनाती करे, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष की जान न जाए।
छुट्टियों के दिन और बदतर होते हैं हालात
अस्पताल में घाटकोपर, कुर्ला, विक्रोली और कांजुरमार्ग से रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। कर्मचारियों की भारी कमी का सबसे भयावह असर रविवार को देखने को मिलता है, जब महज एक डॉक्टर के भरोसे लगभग ८०० मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी होती है। अकेले डॉक्टर को ही मरीज की शुरुआती जांच, पर्ची बनाने से लेकर इलाज की पूरी प्रक्रिया संभालनी पड़ती है। ऐसे में मरीजों को पर्याप्त समय और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना नामुमकिन साबित हो रहा है।

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