मुख्यपृष्ठसमाचारशहनाई नवाज की स्मृति को किलकारी के बच्चों ने किया सलाम

शहनाई नवाज की स्मृति को किलकारी के बच्चों ने किया सलाम

अनिल मिश्र / पटना

महान शहनाई वादक एवं भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की पुण्यतिथि के अवसर पर किलकारी बिहार बाल भवन, गया में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बच्चों को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के जीवन, संघर्ष, संगीत साधना एवं भारतीय संगीत में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में प्रमंडलीय कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव ने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां भारतीय संस्कृति और संगीत की ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी शहनाई की मधुर धुन से न केवल देश, बल्कि पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसे महान कलाकारों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपनी कला के प्रति निरंतर मेहनत और समर्पण की भावना रखनी चाहिए।
वहीं, संगीत प्रशिक्षक संदीप कुमार सिन्हा ने बच्चों को बिस्मिल्लाह खां की संगीत साधना के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने शहनाई को केवल एक वाद्य यंत्र के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक विशिष्ट पहचान के रूप में स्थापित किया। उनकी कला, अनुशासन और संगीत के प्रति समर्पण आज भी कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने बच्चों को संगीत की बारीकियों को समझने और नियमित अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं, उनकी उपलब्धियों और संगीत यात्रा के बारे में जाना। बच्चों ने उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए भारतीय कला एवं संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया।
गया के विख्यात कलाकार दिनेश कुमार मौवार ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के जीवन और उनके सादगीपूर्ण व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में किलकारी के बच्चों में संगीत विद्या से जुड़ी खुशी कुमारी, आकांक्षा, अदिति, गौरव, अमन, सौरभ, विशाल, खुशी एवं अन्य बच्चों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रमंडलीय कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव, संगीत प्रशिक्षक संदीप कुमार सिन्हा, दिनेश कुमार, नाटक प्रशिक्षक नंदकिशोर एवं नृत्य प्रशिक्षक गौतम कुमार गोलू सहित किलकारी के बच्चे उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को महान कलाकारों के जीवन और उनकी कला-साधना से जोड़ना तथा भारतीय संगीत एवं संस्कृति के प्रति उनमें रुचि और सम्मान की भावना विकसित करना था।

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