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सीयूएसबी में संस्कृत अध्ययन केंद्र का सत्रारंभ

अनिल मिश्र / पटना

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संचालित संस्कृत अध्ययन केंद्र में सत्रारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कामेश्वरनाथ सिंह ने कहा कि संस्कृत हमारे संस्कारों की भाषा है। भाषा की प्रगाढ़ता और महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यदि संस्कृत भाषा का ज्ञान हो तो हम किसी भी देशी-विदेशी भाषा को अत्यंत सरलता से सीख सकते हैं। संस्कृत हमारे समय की जरूरत है। आज सूचना तकनीक के क्षेत्र में भी इसका उपयोग हो रहा है।
इस अवसर पर भाषा एवं साहित्य पीठ के अधिष्ठाता एवं केंद्र प्रभारी प्रो. विपिन कुमार सिंह ने कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं संस्कृत के पठन-पाठन को उच्च और व्यापक स्तर तक ले जाने का प्रयास करेंगे।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय भाषा विभाग के सहायक आचार्य डॉ. कर्मानंद आर्य ने संस्कृत भाषा के अकादमिक और सामाजिक प्रभाव तथा महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा सभी के लिए होती है, अत: संस्कृत भी सभी के लिए है। संस्कृत हमारी संस्कृति की धरोहर है। यह केवल कर्मकांड या अतीत की भाषा नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक विज्ञान, कंप्यूटर, भाषाविज्ञान और मानवीय मूल्यों का भी समावेश है।
उन्होंने नवागंतुक छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि संस्कृत का अध्ययन करके प्रतिभागी न केवल अपने ज्ञान में वृद्धि करेंगे, बल्कि भविष्य की असीम संभावनाओं के द्वार भी खोल सकते हैं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलानुशासक और छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीएसडब्ल्यू) भी सभागार में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से आए आचार्यों ने भी संस्कृत अध्ययन केंद्र में प्रवेश लिया।
कार्यक्रम का संचालन भाषा एवं साहित्य विभाग के छात्र रवि कुमार और नूपुर ने किया। कार्यक्रम में भाषा एवं साहित्य पीठ के डॉ. सरोज कुमार, डॉ. अर्पणा झा, डॉ. शांति भूषण, डॉ. अनुज लुगुन, डॉ. कफील अहमद नसीम, प्रो. सुधांशु झा, प्रो. बुधेंद्र सिंह समेत विश्वविद्यालय के अन्य गणमान्य प्रोफेसर और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
विद्यार्थियों में अंजना, ज्योति, पूजा, श्वेता, आफरीन, करिश्मा, प्रिया, रिम्पी, नंदनी, तनूजा, अनुप्रिया, सिमरन, अर्चना, दिव्यांशु, गौतम, पियूष, निरंजन, प्रदीप, अनंत, सन्नी, आयुष और मेहुल आदि ने कार्यक्रम की प्रस्तुतियों से समां बांधा। धन्यवाद ज्ञापन संस्कृत शिक्षक रोशन मौर्य ने किया।

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