अनिल मिश्र / पटना
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग की शोधार्थी निशी श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया के बाली में आयोजित 11वें वर्ल्ड डिसएबिलिटी एंड रिहैबिलिटेशन कॉन्फ्रेंस (डब्ल्यूडीआरसी-2026) में भाग लेकर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन द इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नॉलेज मैनेजमेंट (टीआईआईकेएम) द्वारा आयोजित किया गया था।
प्रो. चेतना जायसवाल के मार्गदर्शन में निशी श्रीवास्तव ने इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। सम्मेलन में विश्वभर से प्रतिष्ठित मनोवैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भाग लिया।
निशी ने ‘साइकोसोशल डिटरमिनेंट्स ऑफ क्वालिटी ऑफ लाइफ अमंग पर्सन्स विद लोकोमोटर डिसेबिलिटी: द मॉडरेटिंग रोल ऑफ एम्प्लॉयमेंट’ विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। उनके शोध में दिव्यांगजनों के जीवन की गुणवत्ता एवं कल्याण, सामाजिक समावेशन, रोजगार के महत्व तथा दिव्यांगजन सहायता प्रणालियों से संबंधित नीतिगत पहलुओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन किया गया।
शोध-पत्र प्रस्तुति के अतिरिक्त निशी को ‘मेंटल हेल्थ एंड वेल-बीइंग इन डिसेबिलिटी कम्युनिटीज’ शीर्षक वाले सत्र के लिए ‘बेस्ट प्रेजेंटर’ अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि उनके शोध की गुणवत्ता तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी अकादमिक प्रतिभा को रेखांकित करती है।
इस उपलब्धि पर सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने निशी को बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध प्रस्तुत करना विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने उनके उज्ज्वल अकादमिक एवं शोध भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मनोवैज्ञानिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मंगलेश कुमार मंगलम, स्कूल के डीन प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह तथा विभाग के अन्य शिक्षकों ने भी निशी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी यह उपलब्धि अन्य शोधार्थियों को भी उत्कृष्ट एवं समाजोपयोगी शोध के लिए प्रेरित करेगी।
