राजेश सरकार
प्रयागराज। सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था और मरीजों की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कड़े तेवर दिखाते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि अब नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संगम सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम ने साफ कहा कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में मरीज देखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई सरकारी चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करता पाया गया तो उसके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने निजी अस्पताल संचालकों को भी सख्त संदेश देते हुए कहा कि यदि उनके यहां कोई सरकारी डॉक्टर प्रैक्टिस करते हुए पाया गया, तो संबंधित अस्पताल और नर्सिंग होम का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। प्रशासन के इस रुख से निजी स्वास्थ्य संस्थानों में हलचल बढ़ गई है।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मेडिकल कॉलेज प्रशासन और सरकारी अस्पतालों के सीएमएस को ऐसे चिकित्सकों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अपर जिलाधिकारी, अपर नगर मजिस्ट्रेट और एलआईयू को औचक निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डीएम ने सख्त लहजे में कहा, “दो नावों पर सवारी नहीं चलेगी। सरकारी नौकरी करते हुए निजी कमाई का खेल अब किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।” उन्होंने मेडिकल एसोसिएशन और नर्सिंग होम एसोसिएशन को भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि कई सरकारी डॉक्टर अस्पतालों में कम और निजी क्लीनिकों में अधिक समय देते हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं और मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पाता।
अब प्रशासन की इस सख्ती के बाद सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में वास्तविक सुधार होगा या यह अभियान भी समय के साथ धीमा पड़ जाएगा।
