मुख्यपृष्ठनए समाचार‘मौत का कॉरिडोर’ बना घोड़बंदर रोड...ट्रैफिक का ‘ब्लैक होल’ बना गायमुख घाट!

‘मौत का कॉरिडोर’ बना घोड़बंदर रोड…ट्रैफिक का ‘ब्लैक होल’ बना गायमुख घाट!

-मरम्मत के नाम पर मजाक, भरते ही दोबारा उभर रहे गड्ढे

सामना संवाददाता / मुंबई

ठाणे का घोड़बंदर रोड इन दिनों किसी ‘मौत के कॉरिडोर’ वाले रास्ते से कम नहीं लगता। २० किलोमीटर लंबा यह मार्ग वाहन चालकों को यातनाएं दे रहा है। सबसे जटिल गायमुख घाट बना हुआ है, जो ट्रैफिक का असली ‘ब्लैक होल’ बनकर रोजाना लाखों यात्रियों को घंटों तक जाम में झोंक रहा है। दूसरी तरफ इसी एक सड़क पर बिना किसी समन्वय के अलग-अलग विभाग एक साथ काम शुरू कर देते हैं, जिससे अव्यवस्था और बढ़ जाती है। मरम्मत के नाम पर भी सिर्फ मजाक किया जा रहा है। इस वजह से गड्ढे भरने के कुछ ही दिनों में वे दोबारा उभरे नजर आते हैं। दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस की कमी के कारण तैनात किए गए वार्डन भी मुसीबत में इजाफा कर रहे हैं, जिससे यातायात प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है। बढ़ती भीड़, अवैध ओवरटेकिंग, असुरक्षित सड़कें और अनियोजित विकास इन सबने मिलकर घोड़बंदर रोड को ठाणे का सबसे खतरनाक और त्रासदायक मार्ग बना दिया है।
उल्लेखनीय है कि ठाणे का घोड़बंदर रोड आज एक ऐसा संकट बन चुका है, जिसकी मार रोज लाखों यात्रियों को झेलनी पड़ रही है। पूर्व और पश्चिम एक्सप्रेस हाईवे को जोड़ने वाला यह अहम २० किलोमीटर लंबा मार्ग गड्ढों, अव्यवस्था और सरकारी विभागों की आपसी अनदेखी के कारण किसी मौत के जाल से कम नहीं रह गया है। बिना रोशनी के अंधेरे मोड़, बिना चिह्नित लेन, दिनभर का अंतहीन जाम और खतरनाक गड्ढे इस सड़क को चलने लायक नहीं, बल्कि डरने लायक बना चुके हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार वर्षों से सुरक्षित और सुचारु घोड़बंदर रोड का जो सपना देखा गया था, वह आज भी हवा में लटका है।
एजेंसियों की लड़ाई में पिस रहा शहर
जस्टिस फिर घोड़बंदर रोड अभियान की संस्थापक व सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा राय इस अव्यवस्था के खिलाफ लड़ाई की अगली पंक्ति में हैं। उनका आरोप है कि ठाणे मनपा, ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी के बीच कोई समन्वय नहीं है। कामों की योजना नहीं, जमीनी निगरानी नहीं और जवाबदेही कहीं मौजूद नहीं। कापुरबावड़ी से घोड़बंदर गांव तक का यह पूरा मार्ग ठाणे मनपा, पीडब्ल्यूडी और एमएमआरडीए के बीच बंटा हुआ है। यही बंटवारा समस्या का सबसे बड़ा कारण है। बिना तालमेल के शुरू होने वाले काम सड़क को एक स्थाई निर्माण क्षेत्र में बदल देते हैं। सब एजेंसियां अपनी-अपनी योजनाएं चलाती हैं और नतीजा पूरी सड़क ‘डेडली ब्लैक होल’ में तब्दील हो जाती है।

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